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वाराणसी हादसा: अलर्ट के बाद भी नहीं बदला था ट्रैफिक रूट

Home | Last Updated : May 16, 2018 03:42 PM IST

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दि राइजिंग न्यूज़

वाराणसी।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मंगलवार की शाम एक दर्दनाक घटना घटी। इसमें लहरतारा से चौकाघाट तक बन रहे निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक हिस्सा गिर गया, जिसमें दबकर 20 लोगों की मौत हो गई। एनडीआरएफ की तरफ से रात भर चले रेस्क्यू ऑपरेशन में मलबे में दबे सभी मृतकों और घायलों को निकाल लिया गया।

 

दरअसल, जब सिस्टम की संजीदगी दम तोड़ दे, जब आम लोगों की जान की कीमत दो कौड़ी की रह जाए और जब लापरवाही सारी हदें पार कर दे तो वही होता है जो वाराणसी में हुआ। एक दिन बाद भी वाराणसी उस हादसे के सदमे में है जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई।

विवादों में घिरा रहा फ्लाईओवर

दरअसल, अखिलेश सरकार में एक अक्टूबर 2015 को चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर के विस्तारीकरण का शिलान्यास हुआ और फिर तेजी से निर्माण शुरू किया गया। तब से लेकर आज तक इस फ्लाईओवर का निर्माण विवादों में ही रहा। अखिलेश सरकार के दौरान भी कई बार इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बदली गई।

 

काम नहीं हुआ पूरा

2017 में योगी सरकार आई तो इस पुल का काम जल्द पूरा करने के निर्देश जारी किए गए। फ्लाईओवर का निर्माण मार्च 2019 तक पूरा होना था, लेकिन अधिकारियों ने वाहनों के दबाव का हवाला देकर अक्टूबर 2019 तक काम को पूरा करने वक्त मांगा।

63 में से 45 पिलर ही अब तक तैयार

मिल रही जानकारी के मुताबिक 1710 मीटर लंबे इस फ्लाईओवर का निर्माण 30 महीने में पूरा होना था, लेकिन अभी तक इस फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। इस फ्लाईओवर प्रोजेक्ट की लागत 77.41 करोड़ रुपये है, जिसके अंतर्गत 63 पिलर बनने हैं। लेकिन अभी तक 45 पिलर ही तैयार हुए हैं।

 

परियोजना प्रबंधक के खिलाफ FIR

खबरों की मानें तो 19 फरवरी को यूपी सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक के खिलाफ सिगरा थाने में लापरवाही को लेकर मुकदमा भी दर्ज कराई गई थी। कहा जा रहा है कि फ्लाईओवर के निर्माण को लेकर कई बार प्रशासन को भी अलर्ट किया गया था। इस पुल का निर्माण रूट डायवर्ट करके कराई जाए वरना बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान रूट डायवर्ट नहीं किया गया।

नियम की अनदेखी

नियम के मुताबिक इस तरह के निर्माण के दौरान कार्यस्थल को सील कर दिया जाता है। निर्माण क्षेत्र से चार-चार फीट दाएं और बाएं बैरीकेडिंग की जाती है। लाल झंडे और लाइट लगाई जाती है। लेकिन वाराणसी में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।

 

इस बीच एनडीआरएफ ने बड़ा खुलासा किया है, NDRF के एक अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुल निर्माण निगम इस 2261 मीटर लंबे फ्लाईओवर का निर्माण 129 करोड़ की लागत से कर रहा था। फ्लाईओवर का जो हिस्सा गिरा है, उसे तीन महीने पहले ही बनाया गया था।



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