Ali Asgar Faced Molestation in The Getup of Dadi

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

भारतीय जनता पार्टी का दुर्ग गोरखपुर, 20 साल के बाद दरकता नजर आ रहा है। यहां हुए उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार उपेंद्र शुक्ल सपा के प्रवीन निषाद से पीछे चल रहे हैं। ये नतीजा चौंकाने वाला है क्योंकि 1989 से गोरखपुर सीट बीजेपी के पास है। इस बार पार्टी के लिए हालात 1998 और 1999 जैसे लग रहे हैं जब बीजेपी को सपा से कड़ा मुकाबला मिला था और योगी का यहां से जीतने में पसीना छूट गया था।

 

गोरखपुर उपचुनाव 2019 का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में बीजेपी ने जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, पिछले एक महीने से सीएम योगी आदित्यनाथ और उनकी कैबिनेट के दिग्गजों ने यहां डेरा जमा रखा था लेकिन 23 साल पुरानी दुश्मनी भुलाकर सपा-बसपा एक साथ आए तो बीजेपी के लिए जीत मुश्किल हो गई।

अवैद्यनाथ की सियासी विरासत 1998 में उनके उत्तराधिकारी और यूपी के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभाली। योगी लगातार पांच बार यहां से सांसद बने। वे 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर जीते लेकिन 1998 और 1999 में योगी को गोरखपुर  संसदीय सीट जीतने के लिए लोहे के चने चबाने पड़े थे।

 

1998 के लोकसभा चुनाव से योगी आदित्यनाथ ने सियासत में कदम रखा। उनके सामने सपा ने जमुना प्रसाद निषाद को मैदान में उतारा था। योगी को 2 लाख 68 हजार 428 वोट मिले थे। जबकि सपा उम्मीदवार को 2 लाख 42 हजार 222 वोट मिले। इस तरह योगी महज 26 हजार 206 वोट से जीते। वहीं बीएसपी उम्मीदवार ने करीब 94 हजार वोट हासिल किए थे और कांग्रेस को 20 हजार वोट मिले थे। यानी 1998 में अगर सपा और बसपा एक होते तो योगी संसद ही नहीं पहुंच पाते।

योगी आदित्यनाथ को 1998 से ज्यादा कड़ा मुकाबला 1999 में मिला। उनका ये दूसरा चुनाव था। योगी बीजेपी से उम्मीदवार थे और उनके सामने सपा ने दोबारा फिर जमुना प्रसाद निषाद को मैदान में उतारा। निषाद ने योगी को पहले से ज्यादा कड़ा मुकाबला दिया और योगी को दोबारा से जीत दर्ज करने में लोहे के चने चबाने पड़े। 1999 के लोकसभा चुनाव में योगी को 2 लाख 67 हजार 382 वोट मिले, वहीं सपा के जमुना प्रसाद को 2 लाख 60 हजार 43 वोट मिले थे। इस तरह योगी महज 7 हजार 339 वोट से जीत दर्ज कर सके थे।

 

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