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दि राइजिंग न्यूज़

चंडीगढ़।

 

साध्वियों से बलात्कार के जुर्म में बीस साल जेल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम से सीबीआइ की टीम ने मंगलवार को तीन घंटे तक रोहतक की सुनारिया जेल पूछताछ की। टीम मंगलवार को बेहद गोपनीय तरीके से जेल में पहुंची। वहां राम रहीम से मर्डर और साधुओं को नपुंसक बनाए जाने के संबंध में पूछताछ की गई।

 

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सीबीआइ की टीम सुबह 10:50 बजे सुनारिया जेल पहुंची थी। इस दौरान जेल में किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया गया। करीब तीन घंटे तक सीबीआइ ने बाबा से उस पर लगे हत्या और साधुओं को नपुंसक बनाने के संबंध में पूछताछ की। राम रहीम 25 अगस्त से जेल में बंद है।

राम रहीम की चाल

 

राम रहीम ने सीबीआइ कोर्ट के फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उसके वकील ने कोर्ट को बताया है कि राम रहीम पर लगाए गए 30 लाख रुपये के जुर्माने को देने में डेरा सक्षम नहीं है, क्योंकि डेरा के सभी खाते और संपत्तियां सील कर दी गई हैं। कोर्ट ने 2 महीने के अंदर जुर्माना जमा करवाने के आदेश दिए हैं।

 

इससे पहले हाई कोर्ट ने राम रहीम की याचिका स्वीकार कर लिया। इसमें उसने सीबीआई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। इसके साथ ही दोनों साध्वियों द्वारा राम रहीम को उम्रकैद की सजा की मांग से संबंधित याचिक भी स्वीकार कर ली गई थी। राम रहीम के वकील एसके गर्ग नरवाना ने राम रहीम को निर्दोष बताया है।

पोटेंसी टेस्ट नहीं कराने का आरोप

 

राम रहीम ने कहा था कि 1990 के बाद वह नपुंसक हो गया था। उसके खिलाफ दर्ज रेप के सभी मामले फर्जी हैं। उसका सेक्सुअल पोटेंसी टेस्ट नहीं करवाया गया। वह शारीरिक संबंध नहीं बना सकता। उसने 6 साल बाद दोनों साध्वियों के हलफनामा दर्ज होने पर सवाल उठाए। गुमनाम पत्र लिखने वाली साध्वी को सामने आने की मांग की है।

 

रेयरेस्ट ऑफ दी रेयर केस माना

 

बताते चलें कि सीबीआइ की स्पेशल कोर्ट ने राम रहीम को 20 साल की सजा सुना चुकी है। कोर्ट ने दो साध्वियों से रेप केस में अलग-अलग 10-10 साल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा 15-15 लाख रुपये दोनों मामलों में जुर्माना भी लगाया था। कोर्ट ने राम रहीम पर सख्त टिप्पणी करते हुए अपराध को रेयरेस्ट ऑफ दी रेयर मानते हुए सजा दी थी।

शारीरिक-मानसिक शोषण किया

 

सीबीआइ कोर्ट ने कहा था कि जो लड़कियां उसको भगवान की तरह पूजती थीं, उसने उन्हीं के साथ घिनौनी हरकत की है। ऐसा करके दोषी ने उनका विश्वास तोड़ा है। पीड़ितों का शारीरिक और मानसिक शोषण किया है। पीड़िता राम रहीम के संरक्षण में रहती थीं। वहां उनके साथ ये हरकत की गई। ये मामला कस्टोडियल रेप से कम प्रतीत नहीं हो रहा है।

मासूम लड़कियों के साथ किया रेप

 

सीबीआइ कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने अपने फैसले में गुरमीत पर लगे आरोपों को बेहद गंभीर मानते हुए कहा था कि वो दया का हकदार नहीं है। कोर्ट का मानना था, “दोषी ने खुद को भगवान के रूप में पेश किया और अपनी ताकत का दुरुपयोग करते हुए मासूम लड़कियों के साथ रेप किया। यह मामला रेयरेस्ट ऑफ दी रेयर केस की श्रेणी में आता है।”

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