Rani Mukerji to Hoist the National flag at Melbourne Film Festival

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

दिल्ली पुलिस से मंजूरी ना मिलने के बाद भी गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी, अखिल गोगोई व शहला राशिद युवा हुंकार रैली और जनसभा के लिए संसद मार्ग पहुंचे। मेवाणी की इस रैली में प्रशांत भूषण भी पहुंचे। राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित हुंकार रैली से पहले ही विवाद हो गया था। दिल्ली पुलिस ने एनजीटी के आदेश का हवाला देते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट पर मेवाणी की रैली को मंजूरी नहीं दी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि मेवाणी को रामलीला मैदान में रैली करने को कहा गया था।

 

पीएम से मिलेगा एक प्रतिनिधिमंडल

रैली के आयोजनकर्ताओं में एक मोहित पांडे ने बताया कि पुलिस की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है। मोहित ने बताया कि वे लोग प्रधानमंत्री आवास तक मार्च नहीं करेंगे, लेकिन एक प्रतिनिधिमंडल मनुस्मृति और संविधान साथ लेकर पीएम मोदी से मिलेगा।

पुलिस ने बताई है प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह

दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसने पूरी तैयारी कर रखी है, जैसी भी स्थिति होगी, उससे निपटने के लिए सारी तैयारी है। पुलिस के मुताबिक आयोजकों को रैली के लिए वैकल्पिक जगह बताई गई है और सभी पक्षों से बातचीत चल रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भीम आर्मी भी जंतर-मंतर पर रैली में शामिल हो सकती है। भीम आर्मी के कई सदस्य चंद्रशेखर आज़ाद के समर्थन में वहां पहुंच रहे हैं।

मोदी सरकार के खिलाफ रैली

यह रैली मोदी सरकार की नाकाम नीतियों और मुस्लिम-दलितों पर अत्याचार के खिलाफ आयोजित की जा रही है। सामाजिक न्याय के नाम पर प्रस्तावित रैली को हुंकार रैली नाम दिया गया है। रैली दोपहर 12 बजे से संसद मार्ग  से शुरू होगी। रैली में हिस्सा लेने वाले सभी लोगों को यहां बुलाया गया है।

 

इस रैली का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय की अवाज बुलंद करने, चंद्रशेखर की रिहाई और युवाओं की शिक्षा-रोजगार की मांग है। इस रैली में गुजरात के विधायक और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी, मानवाधिकार कार्यकर्ता अखिल गोगोई और बेजवाड़ा विल्सन समेत उमर खालिद और शहला रशीद जैसे छात्र नेता भी शामिल रहेंगे।

डीसीपी ने किया था ट्वीट

इस संबंध में नई दिल्ली के डीसीपी की तरफ से सोमवार देर रात एक ट्वीट किया गया। ट्वीट में लिखा गया कि एनजीटी के आदेशों को मद्देनजर रखते हुए अभी तक पार्लियामेंट स्ट्रीट पर प्रस्तावित प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस की तरफ से इजाजत नहीं दी गई है। डीसीपी के ट्वीट में ये भी बताया गया कि प्रदर्शन के आयोजकों को किसी दूसरी जगह जाने की सलाह दी गई है, जिसे वो मानने को राजी नहीं हैं।

 

शहला ने दिया जवाब

नई दिल्ली डीसीपी के इस ट्वीट के बाद हुंकार रैली का आयोजन कर रहे लेफ्ट संगठन इसके विरोध में उतर आए। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष और लेफ्ट छात्र नेता शहला राशिद ने ट्विटर पर ही अपने इरादे जाहिर कर दिए। डीसीपी के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए शहला ने लिखा, “डीसीपी सर, रैली तो वहीं कराएंगे।”

प्रशांत भूषण ने भी किया विरोध

पुलिस की दलील का मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने भी विरोध किया। उन्होंने काउंटर करते हुए कहा कि एनजीटी का आदेश जंतर मंतर के लिए है, न कि पार्लियामेंट स्ट्रीट के लिए। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस रैली को रोकती है तो यह अलोकतांत्रिक और मौलिक अधिकारों का हनन होगा।

 

बता दें कि जिग्नेश मेवाणी इस रैली का काफी पहले ऐलान कर चुके है। उन्होंने दिल्ली पुलिस से इस संबंध में इजाजत भी मांगी है। सोमवार को पुलिस ने कहा था कि रैली की अपील विचाराधीन है और इसके बाद देर रात ट्वीट कर साफ किया कि परमिशन नहीं दी गई है।

ये है NGT का ऑर्डर

एनजीटी ने पिछले साल पांच अक्तूबर को अधिकारियों को जंतर मंतर रोड पर धरना, प्रदर्शन, लोगों के जमा होने, भाषण देने और लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल संबंधी गतिविधियां तत्काल रोकने का आदेश दिया था।

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