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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद से ही रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जहां एक तरफ देश के बैंकों को सबसे अधिक मात्रा में जाली नोट मिले, वहीं इस दौरान संदिग्ध लेन-देन में भी 480 प्रतिशत से भी अधिक का इजाफा हुआ था। पहले भी आरबीआइ की सालाना रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ था कि 1000 रुपये के आठ करोड़ 90 लाख प्रतिबंधित नोट वापस नहीं आए। इसके बाद एक आरटीआइ के जवाब में अब एक और नया खुलासा हुआ है।

 

एक और बड़ा खुलासा

नोटबंदी के बाद जारी किये गए 2000 और 500 रुपये के नये नोटों की ढुलाई में भारतीय वायु सेना के अत्याधुनिक परिवहन विमान- सी-17 और सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस के इस्तेमाल पर 29.41 करोड़ रुपये से अधिक की रकम खर्च की गई। भारतीय वायु सेना द्वारा एक आरटीआइ आवेदन का दिये गए जवाब के अनुसार सरकार के आठ नवंबर 2016 को 1000 और 500 रुपये के पुराने नोटों को अचानक से प्रचलन से बाहर करने के बाद उसके परिवहन विमानों सी-17 और सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस ने सेक्युरिटी प्रिंटिंग प्रेस और टकसालों से देश के विभिन्न हिस्सों में नोटों की ढुलाई करने के लिये 91 चक्कर लगाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को प्रचलन से बाहर करने की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री की इस घोषणा से 86 फीसदी नोट व्यवस्था से बाहर हो गए थे। इसकी भरपाई नोटबंदी के बाद जारी 2000 और 500 रुपये के नए नोटों से अविलंब करने की आवश्यकता थी।

 

नये नोटों की छपाई पर 7965 करोड़ रुपये खर्च हुए

आरबीआइ और सरकारी आंकड़ों के अनुसार आठ नवंबर 2016 तक 500 के 1716.5 करोड़ नोट थे और 1000 रुपये के 685.8 करोड़ नोट थे। इस तरह इन नोटों का कुल मूल्य 15.44 लाख करोड़ रुपये था जो उस समय प्रचलन में मौजूद कुल मुद्रा का तकरीबन 86 फीसदी था।

सेवानिवृत्त कोमोडोर लोकेश बत्रा की आरटीआइ के जवाब में वायु सेना ने कहा कि उसने सरकारी स्वामित्व वाले सेक्युरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड को अपनी सेवाओं के बदले में 29.41 करोड़ रुपये का बिल सौंपा है।

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