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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

फॉरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट (FERA) वॉयलेशन केस में दिल्ली की अदालत ने विजय माल्या को अपराधी करार देने का प्रॉसेस शुरू कर दिया है। माल्या को 18 दिसंबर को कोर्ट में पेश होने का आखिरी मौका दिया गया है। अगर इस तारीख को माल्या पेश नहीं होते हैं तो कोर्ट उन्हें अपराधी घोषित कर देगी। चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट दीपक शेहरावत ने इन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) को इस मामले में जरूरी कदम उठाने को कहा है।

ED ने कोर्ट को क्या बताया?

 

कोर्ट ने ये ऑर्डर तब दिया, जब ED के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एनके मट्टा ने बताया कि माल्या के खिलाफ एक ओपन एंडेड नॉन बेलेबल वारंट (NBW) पहले जारी किया गया था, लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा सका। इसके बाद एजेंसी के सामने सीआरपीसी की धारा 82 और 83 के तहत प्रॉसेस शुरू करने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं बचता।

ED अब क्या कदम उठाएगी?

 

संभव है कि ED माल्या की पेशी के लिए कई कदम उठाए, इसमें अखबारों में इस संंबंध में जानकारी पब्लिश करवाना भी शामिल है। कोर्ट ने 12 अप्रैल को माल्या के खिलाफ ओपन एंडेड NBW जारी किया था। इसकी तामीली के लिए कोई समय सीमा तय नहीं होती है।

NBW जारी करते वक्त कोर्ट ने क्या कहा था?

 

12 अप्रैल को ओपन एंडेड NBW जारी करने से पहले पिछले साल 4 नवंबर को कोर्ट ने माल्या के खिलाफ NBW भी जारी किया था।

इस दौरान कोर्ट ने कहा था, "माल्या वापस लौटने की इच्छा नहीं रखते हैं और वो इस देश के कानून को तुच्छ समझते हैं। उनके खिलाफ कई मामलों में सुनवाई चल रही है, वो उनमें भी हाजिर होने से बच रहे हैं। इसलिए उन्हें बलपूर्वक वापस लाने की प्रॉसेस को शुरू किया जाना चाहिए।'

सुनवाई ना होने पर माल्या का क्या तर्क था?

 

कोर्ट ने ये भी कहा था, "माल्या ने अपनी पिटीशन में कहा है कि वो भारत लौटना चाहते हैं, लेकिन मजबूर हैं क्योंकि भारतीय अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया है। उनकी (माल्या की) नीयत ठीक नहीं है और ये कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग है।'

 

9 जुलाई को कोर्ट ने माल्या को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश होने से दी गई छूट को भी खत्म कर दिया था और 9 सितंबर को पेशी का आदेश दिया था। तब माल्या ने कहा था कि वे भारत आना चाहते हैं, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट कैंसल कर दिया है इसलिए मजबूर हैं।

किस मामले में माल्या को पेश होना है?

 

ED ने माल्या की तरफ से एक ब्रिटिश फर्म को 2 लाख डॉलर करीब 1.3 करोड़ रुपए देने में मामले में सम्मन भेजा था। माल्या ने 1996,1997 और 1998 में लंदन और कुछ यूरोपियन देशों में हुई फॉर्मूला वन वर्ल्ड चैम्पियनशिप के दौरान किंगफिशर का लोगो डिस्प्ले करने के लिए दिए थे। ED के मुताबिक, ये रुपए RBI से इजाजत लिए बगैर दिए गए थे, जो कि FERA का उल्लंघन है। ED ने इस मामले में किंगफिशर एयरलाइंस के चेयरमैन के खिलाफ NBW जारी करने की अपील की थी, ताकि सुनवाई की फाइनल स्टेज में पहुंच चुके इस मामले में माल्या पेश हो।

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