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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

राजधानी के मैक्स अस्पताल के जिन दो डॉक्टर्स ने एक नवजात शिशु को मृत बता उसका अंतिम संस्कार करने के लिए परिवार वालों को प्लास्टिक के बैग में बच्चे को सौंप दिया था, उनके खिलाफ अस्पताल ने कड़ा कदम उठाया है। अस्पताल ने डॉक्टर एपी मेहता और विशाल गुप्ता को लापरवाही दिखाने के आरोप में मैक्स हॉस्पिटल से निकाल दिया है।

 

रविवार की रात को अस्पताल प्रशासन ने यह फैसला लगातार बढ़ते दबाव और अस्पताल की साख पर उठ रहे सवालों के मद्देनजर लिया। दरअसल शालीमार बाग में स्थित मैक्स हॉस्पिटल में गुरुवार को एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। इनमें से एक लड़का था और दूसरी लड़की। डिलीवरी के वक्त बच्चों की उम्र 23 सप्ताह थी।

परिवार वालों ने बताया कि डिलीवरी के साथ ही बच्ची की मौत हो गई। डॉक्टर्स ने दूसरे जीवित बचे बच्चे का इलाज शुरू किया, लेकिन एक घंटे बाद अस्पताल ने बताया कि दूसरा बच्चा भी मर गया।

 

अस्पताल ने इसके बाद दोनों बच्चों की डेड बॉडी को प्लास्टिक के बैग में लपेटकर, टेप लगाकर परिजनों को सौंप दिया। दोनों बच्चों की डेड बॉडी लेकर लौट रहे परिजन लौट रहे थे। दोनों पार्सलों को महिला के पिता ने ले रखा था। रास्ते में उन्हें एक पार्सल में हलचल महसूस हुई। उन्होंने तुरंत उस पार्सल को फाड़ा तो अंदर बच्चा जीवित मिला। वे तुरंत उसे लेकर एक नजदीकी अस्पताल गए, जहां दूसरा बच्चा जीवित है और उसका इलाज चल रहा है।

बच्चे के नाना ने बताया, “रास्ते में हलचल महसूस हुई तो हमने पार्सल फाड़ा तो देखा कागज और कपड़े के अंदर लपेटकर रखे बच्चे की सांसें चल रही थीं। हम तुरंत उस बच्चे को पास में ही मौजूद अग्रवाल अस्पताल ले गए।”

 

पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।

 

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