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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

नोटबंदी के बाद कालेधन को ठिकाने लगाने के लिए देश भर में जबरदस्त खेल हुए। हालांकि इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED)  ने सतर्कता दिखाते हुए 9,000 करोड़ रुपये का कालाधन जब्त करने में बड़ी कामयाबी हासिल की। नोटबंदी के बाद ईडी ने 1,000 फर्जी कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। साथ ही FEMA और PMLA के तहत 3,700 मामले दर्ज किए।

 

दरअसल, आठ नवंबर 2016 को रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में 500 और 1000 के नोट बंद करने का ऐलान किया था। मोदी सरकार का कहना था कि उन्होंने कालेधन के खिलाफ कार्रवाई के तहत नोटबंदी की गई। अब भी कालेधन से बनी अनेक अहम संपत्तियों की जांच जारी है। कई नेताओं और प्रभावशाली लोगों की जांच की जा रही है।

मनी लांड्रिग के तहत कालेधन को ठिकाने लगाने में शैल कंपनियों की 48 प्रतिशत भूमिका रही। इसके अलावा कालेधन को ठिकाने लगाने में रियल एस्टेट की 35 प्रतिशत और सोने-चांदी की सात प्रतिशत भूमिका रही। ईडी अब तक 1000 से ज्यादा शैल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।

 

ईडी के मुताबिक फर्जी कंपनियां भ्रष्टाचार की मसीहा बनी थी। ऐसी 1660 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिग के मामले सामने आए। ऐसा ही एक कोलकाता का मामला सामने आया। कोलकाता का एक सीए ऐसी 800 से ज्यादा कंपनियों की बैलेस सीट पर साइन करता था। फिलहाल ईडी दिल्ली के लुटियन जोन समेत कई अहम जगहों की संपत्ति की जांच कर रही है।

दूसरी ओर विपक्ष ने मोदी सरकार के इस फैसले को लोकतंत्र काला दिन बताया था और जोरदार विरोध किया था। नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर आठ नवंबर को जहां विपक्ष ने काला दिवस के रूप में मनाया, तो वहीं मोदी सरकार ने इसको कालेधन के खिलाफ ऐतिहासिक कदम बताया।

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