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Home | 07-Jan-2018 19:50:59 | Posted by - Admin
  • हाईकोर्ट को भी बहकाने से बाज नहीं आ रही पुलिस

  • पीड़ित पक्ष ने एसएसपी से लगाई गुहार, नहीं मिली मदद

   
Latest and Trending Updates of AKTU Vice Chancellor Vinay Kumar Pathak Hooliganism

दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की पुलिस भले ही अपराधियों पर भारी पड़ रही हो लेकिन राजधानी की मुस्‍तैद पुलिस पीड़ित चंद्रेश कुमार और उसके परिजनों को सुरक्षा मुहैया करा पाने में अभी तक फेल है। पीड़ित ने एकेटीयू कुलपति विनय कुमार पाठक के खिलाफ उच्‍च न्‍यायालय में याचिका क्‍या दायर की उसके खिलाफ पुलिस भी खड़ी हो गई। हालांकि न्‍यायालय ने 22 दिसंबर 2017 को पीड़ित के लिए सुरक्षा देने का आदेश जरूर दिया लेकिन पुलिस अभी तक हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

चंद्रेश कुमार ने एसएसपी को दिए गए पत्र में पुलिस सहित कुलपति पर अपनी जान का खतरा बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए लेकिन एक पखवारा से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अभी तक पीडि़त को कोई मदद नहीं मिली। मामले पर आइजी जोन लखनऊ जय नारायण सिंह ने उपयुक्‍त कार्रवाई करने का दम भरा है।

 

 

तालकटोरा के रहने वाले चंद्रेश कुमार ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) के कुलपति विनय कुमार पाठक के खिलाफ अदालत में एक याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने कुलपति को पद से हटाने की मांग की है। चंद्रेश ने याचिका में कहा कि कुलपति विनय कुमार पाठक फर्जी डिग्रियां और अनुभव दिखा कर इस पद तक पहुंचे हैं। लिहाजा विनय इस पद के योग्‍य नहीं है। इतना ही नहीं उन्‍होंने सीबीआइ से जांच कराने की भी मांग की है। एसएसपी दीपक कुमार को 20 दिसंबर 2017 को दिए गए पत्र में चंद्रेश ने बताया कि याचिका दायर करने के बाद से ही कुलपति विनय पाठक अपने रसूख और पहुंच का फायदा उठाते हुए 16 दिसंबर 2017 से लगातार याचिका वापस लेने का दबाव बनाने लगा।

 

 

इसपर जब पीड़ित नहीं तैयार हुआ तो विनय पाठक ने पुलिस अधिकारियों से सांठगांठ करते हुए बाजारखाला थाना क्षेत्र के मिल एरिया में रहने वाले उनके जीजा रामजीत गौतम को सिपाहियों के सहारे उठावा लिया। मामला डीजीपी तक पहुंचा तो रामजीत को छोड़ दिया गया। उन्‍होंने दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने और मुकदमा दर्ज करने के लिए आवेदन किया था लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

 

 

न्‍यायालय का आदेश लापता-

पुलिस ने जब एफआइआर दर्ज नहीं की तो पीड़ित चंद्रेश कुमार ने न्‍यायालय में गुहार लगाई। इस पर न्‍यायालय ने 22 दिसंबर 2017 को एसएसपी लखनऊ को आदेश दिया कि चंद्रेश कुमार को उपयुक्त सुरक्षा दी जाए, जिससे उन्‍हें कोई परेशानी ना हो। इसके बाद भी यह आदेश 07 जनवरी 2018 तक एलआइयू क्षेत्राधिकारी के पास पहुंचा ही नहीं। अब सवाल यह है कि न्‍यायालय का आदेश जारी हुए 16 दिन हो गए। इसके बाद भी यह आदेश ना तो आरआइ पुलिस लाइन पहुंचा और ना ही क्षेत्र‍ाधिकारी के पास। 

 

 

पीड़ित की शिकायत ही गायब-

पीड़ित चंद्रेश कुमार ने एसएसपी के यहां 20 दिसंबर को शिकायती पत्र दिया। जिस पर एफआइआर कराने से लेकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया था लेकिन 07 जनवरी तक यह पत्र तो बाजारखाला थाना पहुंचा और ना ही तालकटोरा थाना पहुंचा। बाजारखाला के मिल एरिया चौकी इंचार्ज राजेंद्र सिंह ने मामले से खुद को अलग करते हुए बताया कि वह 15 से 20 दिसंबर 2017 तक छुट्टी पर थे तो वहीं एसएसआइ बाजारखाला दयाशंकर द्विेदी ने पीड़ित पक्ष तालकटोरा थाना क्षेत्र होने के कारण संबंधित थाने पत्र पहुंचने की बात करते रहे। जबकि तालकटोरा इंस्‍पेक्‍टर उदय प्रताप सिंह प्रार्थना पत्र और एफआइआर को गोपनीय दस्‍तावेज बताते हुए कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। हालांकि क्षेत्र‍ाधिकारी बाजारखाला अनिल कुमार यादव ने जब मामले की जानकारी कराई तो एसएसआइ तालकटोरा अभिमन्‍यु मल ने बताया कि पीड़ित का प्रार्थना पत्र यहां भी नहीं पहुंचा।

 

 

श्रवण साहू हत्‍याकांड में दिखी थी पुलिस की मुस्‍तैदी-

सआदतगंज में रहने वाले श्रवण साहू अपने बेटे आयुष साहू की हत्‍या के केस की पैरवी कर रहे थे। हत्‍यारों ने कई बार उनसे केस वापस लेने का दबाव बनाया, लेकिन श्रवण ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही उन्‍होंने पुलिस से अपनी सुरक्षा की मांग की, लेकिन राजधानी की मुस्‍तैद पुलिस पीड़ित बाप को सुरक्षा देने में नाकाम रही। हत्‍यारों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए एक फरवरी 2017 को रात आठ बजे श्रवण साहू की सरेआम हत्‍या करते हुए आसानी से फरार हो गए थे।

 

 

कुलपति विनय पाठक के कारनामें-

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के विवादित कुलपति विनय पाठक के कारनामे भी विवादों से घिरे रहते हैं। सत्ताधारियों के करीबी बताकर सब पर रौब गांठने वाले विनय पाठक ने प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य ऐसे हाथों में सौंप दिया है जिस पर भ्रष्टाचार के दर्जनों मामले चल रहे हैं। गौरतलब है कि विनय पाठक पर भी फर्जी अनुभव दिखाने का आरोप है, इस मामले में कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने विनय पाठक को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। विनय पाठक पर अन्य आरोप भी लगते रहे हैं-

 

 

  • उत्तराखंड विवि में कार्यकाल के दौरान विनय पाठक पर चहेतों को नौकरी देने का आरोप लगा। जिन लोगों को पाठक ने उत्तराखंड में नौकरी दी उन्हीं लोगों को कोटा में भी पाठक ने अपने कार्यकाल में नियुक्त किया। अब इनमें से कई चेहरे एकेटीयू में भी दिखाई देते हैं। लिखित परीक्षा के नाम पर पारदर्शिता करने के ढोंग का आरोप भी विनय पाठक पर लग चुका है, इसकी लिखित शिकायत भी शासन और प्रधानमंत्री कार्यालय को की जा चुकी है।
  • पाठक पर आरोप है कि अनुभव में हेराफेरी करके इन्होंने कुलपति पद हासिल किया।
  • कुछ दिन पहले पाठक के खिलाफ सैकड़ों अभ्यर्थियों ने धरना-प्रदर्शन कर नियुक्तियों में हेराफेरी का आरोप लगाया है।
  • आरके सिंह और आशीष मिश्र को नियमों की अनदेखी कर विनियमितीकरण करने का आरोप, शासन में जांच चल रही है।

 

 

“चंद्रेश कुमार सहित रामजीत गौतम के संदर्भ की कोई जानकारी नहीं देंगे। एसएसपी के यहां से थाने में सैकड़ों प्रार्थनापत्र आते ही रहते हैं। जहां से पता करना हो पता करिए। हम जानकारी देने के लिए नहीं बैठे हैं।”

उदय प्रताप सिंह

इंस्‍पेक्‍टर तालकटोरा

 

“रामजीत गौतम या चंद्रेश कुमार के प्रार्थना पत्र की जानकारी कराई गई है लेकिन यहां पर कोई भी प्रार्थना पत्र नहीं आया है। पीड़ित पक्ष तालकटोरा थाने का रहने वाला है इसलिए हो सकता है कि कार्रवाई के लिए तालकटोरा थाने में पत्र भेजा गया हो।”

दया शंकर द्विेदी

एसएसआइ, बाजारखाला

 

 

“इस संबंध की जानकारी एसएसआइ तालक‍टोरा अभिमन्‍यु मल से मांगी गई थी। उन्‍होंने बताया कि थाने में कोई शिकायती पत्र नहीं है।”

अनिल कुमार यादव

क्षेत्राधिकारी बाजारखाला

 

 

“हमलोग मामले की जानकारी करते हुए चंद्रेश कुमार के साथ कुछ भी गलत नहीं होने देगें। सभी प्रकार की नियमानुसार और संभव कार्रवाई की जाएगी जिससे पीड़ित पक्ष को राहत मिले।”

जय नारायण सिंह

आइजी, जोन लखनऊ

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