Rani Mukerji to Hoist the National flag at Melbourne Film Festival

दि राइजिंग न्यूज़

आउटपुट डेस्क।

 

आर्थिक-सामाजिक विकास के साथ सांस्कृतिक संबंधों में मजबूती के लिए आठ अगस्त 1967 को दक्षिण-पूर्व एशिया के पांच देशों इंडोनेशिया, मलयेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने मिलकर एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) की स्थापना की। पिछले 50 सालों के दौरान न सिर्फ यह संगठन आकार में बड़ा हुआ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी इसका असर बढ़ा। ब्रुनई, कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस को मिलाकर इसके सदस्य देशों की संख्या 10 हो गई है।

आसियान प्लस

 

वर्ष 1977 के एशियाई आर्थिक संकट के दौरान थाईलैंड में हुई बैठक में इस संगठन में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को मिलाकर आसियान प्लस नामक मंच का गठन किया गया। बाद में ईस्ट एशिया समिट के बैनर तले भारत, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को भी इसमें शामिल कर लिया गया। इस तरह आसियान प्लस नामक मंच अस्तित्व में आया।

अमेरिका और रूस भी जुड़े

 

वर्ष 2011 में छठे ईस्ट एशिया समिट में आसियान को और विस्तार देते हुए इसमें अमेरिका और रूस को भी शामिल कर लिया गया।

शिखर सम्मेलन

 

आसियान नेताओं का पहला शिखर सम्मेलन इंडोनेशिया के बाली में 1976 में हुआ था। मनीला में 1987 में हुए शिखर सम्मेलन में हर पांच साल बाद बैठक का फैसला लिया गया, लेकिन 1992 में सिंगापुर में तय किया गया कि इसके शीर्ष नेता हर 3 साल बाद मिलेंगे। वर्ष 2011 में हर साल सम्मेलन करने का फैसला किया गया। वर्ष 2008 में आसियन चार्टर के अस्तित्व में आने के बाद हर दो साल बाद शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाता है।

दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

 

आसियान देशों का क्षेत्रफल 44 लाख वर्ग किलोमीटर है, जो धरती के क्षेत्रफल का तीन फीसदी है। इसके सदस्य देशों की कुल आबादी 64 करोड़ है जो दुनिया की कुल आबादी का 8.8 फीसदी है। वर्ष 2015 के आंकड़ों के अनुसार इन देशों की सम्मिलित जीडीपी 2.8 लाख करोड़ डॉलर है। इस लिहाज से यह अमेरिका, चीन, जापान, फ्रांस, और जर्मनी के बाद सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

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