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“SC के “बागी” चारों जजों पर चले अवमानना की प्रक्रिया”

Home | 14-Jan-2018 10:55:54 | Posted by - Admin
   
Justice RS Sodhi Attacks on 4 Judges of Supreme Court

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

शीर्ष अदालत के चार जजों ने 12 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यायपालिका के प्रशासन की खामियां खुले तौर पर उजागर कर दी थीं लेकिन, अब बहस इस बात जारी है कि जजों का ये कदम सही था या गलत। विभिन्न राजनीतिक दल, राजनेता और पूर्व सीजेआइ और जज अपनी-अपनी बात रख रहे हैं। ऐसे में जस्टिस आरएस सोढ़ी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस मदन बी लोकुर की निंदा की है।

“सुप्रीम कोर्ट छोड़ दें जज”

जस्टिस सोढ़ी ने सवाल किया है, “प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आपने क्या किया है? क्या आप इस स्तर तक आ सकते हैं? अगर चारों जज कहते, तो CJI दीपक मिश्रा पर महाभियोग चलाने के बारे में फैसला लिया जा सकता था, मैं कहता हूं कि आपको सुप्रीम कोर्ट छोड़ देना चाहिए।”

 

“जजों के खिलाफ चले अवमानना की प्रक्रिया”

जस्टिस आरएस सोढ़ी का कहना है कि चारों जजों के खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। जस्टिस सोढ़ी का चारों जजों से सवाल है, “इस बारे में वो क्या सोचते हैं? क्या सिर्फ वे ही लोग समर्थ हैं और क्या बाकियों में कोई योग्यता नहीं है?”

CJI से आज हो सकती है जजों की मुलाकात

सर्वोच्च न्यायालय के 4 शीर्ष न्यायाधीशों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने से उपजे संकट के बीच प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा बगावती तेवर अपनाने वाले न्यायाधीशों से आज मुलाकात कर सकते हैं, इनमें से दो न्यायाधीशों ने शनिवार को मुद्दा सुलझाने की ओर इशारा भी किया है।

 

इस रिपोर्ट की हालांकि कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि न्यायमूर्ति मिश्रा सवाल उठाने वाले चारों न्यायाधीशों से मुलाकात करेंगे। लेकिन न्यायायमूर्ति कुरियन जोसेफ, रंजन गोगोई और महान्यायवादी केके वेणुगोपाल से मिल रहे संकेतों से इस विवाद पर सुलह के आसार नजर आ रहे हैं।

कोर्ट के अंदर ही सुलझेगा विवाद

मुकदमों के “चुनिंदा” तरीके से आवंटन और कुछ न्यायिक फैसलों के विरुद्ध चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के खिलाफ एक तरह से बगावत का कदम उठाने वाले सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों में से एक न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने भरोसा जताया है कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, उस मुद्दे को कोर्ट के अंदर ही सुलझाया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि इस विवाद को बाहर से सुलझाने की जरूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने फिर दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट में सुधार की जरूरत है। न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, “किसी भी प्रकार का संवैधानिक संकट नहीं है और केवल प्रकिया में समस्या है, जिसे सही कर लिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि चार न्यायाधीशों ने शुक्रवार को जारी पत्र में सबकुछ लिख दिया था और इस पत्र को उन्होंने एक माह पहले ही न्यायमूर्ति मिश्रा को भेज दिया था।

यह पूछे जाने पर कि क्या आपको लगता है कि न्यायाधीशों को अपनी शिकायतें इस तरह सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए थीं, उन्होंने कहा, “जो समस्या है, कोई भी दोनों पक्षों को देख सकता है, हमें जो भी कहना था हमने पत्र में लिख दिया था। एक माह गुजरने के बाद भी उस पत्र का कोई असर होता दिखाई न देने पर हमने पत्र को सार्वजनिक किया।” इस मुद्दे से राष्ट्रपति को अवगत नहीं कराए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति केवल नियुक्ति अधिकारी (अप्वॉइंटिंग अथॉरिटी) हैं।”

 

रंजन गोगोई बोले- कोई संकट नहीं है

चीफ जस्ट‍िस दीपक मिश्रा पर शुक्रवार को आरोप लगाने वाले चार जजों में से एक जस्ट‍िस रंजन गोगोई ने शनिवार को कहा कि कोई संकट नहीं है। न्यायमूर्ति गोगोई एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कोलकाता आए थे। कार्यक्रम के इतर उनसे पूछा गया कि संकट सुलझाने के लिए आगे का क्या रास्ता है, इस पर उन्होंने कहा, “कोई संकट नहीं है”।

बार काउंसिल की पहल 

बार काउंसिल ऑफ इंडिया की शनिवार को दिल्ली में बैठक हुई। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों को छोड़कर उच्चतम न्यायालय के अन्य सभी न्यायाधीशों के साथ मौजूदा संकट पर चर्चा के लिए सात सदस्यीय टीम का गठन किया है। BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि टीम अन्य न्यायाधीशों की राय लेगी।

 

उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही BCI ने कहा कि रोस्टर या मामलों के आवंटन को लेकर न्यायाधीशों के बीच चाहे जो भी मतभेद हो, सार्वजनिक तौर पर राय जाहिर किए बिना अंदरूनी व्यवस्था के जरिए उसका समाधान किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ बगावत कर दी थी। उन्होंने मामलों को आवंटित करने समेत कई समस्याएं गिनाईं थीं।

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