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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

जापान के पीएम शिंजो आबे बुधवार से दो दिन के भारत दौरे पर हैं। दोनों दिन वे गुजरात में ही रहेंगे। मोदी के साथ वे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे। आबे का यह दौरा डिप्लोमैसी के लिहाज से इसलिए अहम है क्योंकि यह डोकलाम पर भारत-चीन के हालिया विवाद के बाद हो रहा है। बुलेट ट्रेन और बाइलैटरल मीटिंग के अलावा भी शिंजो आबे के इस दौरे के कई मायने हैं। इसमें एक हिस्सा मोदी की टच डिप्लोमैसी का भी है। पिछली बार मोदी ने आबे की अगवानी बनारस में की थी। इस बार अहमदाबाद में करने वाले हैं। बता दें कि मोदी-आबे पिछले तीन साल में 10 बार मुलाकात कर चुके हैं।

विदेश मामलों के एक्सपर्ट रहीस सिंह बता रहे हैं इस दौरे के मायने...

 

2014 जैसा इत्तेफाक क्यों?

 

2014 में पीएम बनने के बाद मोदी अगर पड़ोसी देशों के अलावा पहली बार किसी बड़े देश गए थे तो वह जापान था। उनके क्योटो से लौटने के बाद मोदी ने अहमदाबाद में अपने जन्मदिन पर चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग की अगवानी की थी।

 

ठीक तीन साल बाद भी वैसे ही हालात हैं। इस बार मोदी चीन में ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेकर लौटे हैं और उनके 17 सितंबर को जन्मदिन से चार दिन पहले वे अहमदाबाद में ही जापानी पीएम की अगवानी करेंगे।

शिंजो आबे के भारत दौरे के बारे में कुछ प्वाइंट में जानिए...

 

सबसे पहले जानिए: कैसे हैं भारत-जापान के रिश्ते?

 

बौद्ध धर्म की वजह से छठी शताब्दी से ही भारत-जापान के रिश्ते हैं। मॉडर्न हिस्ट्री की बात करें तो दोनों देशों के बीच रिश्ते 1949 से शुरू हुए। दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद भारत ही वह पहला देश था जिसके साथ जापान ने पीस ट्रीटी की थी। तब नेहरू ने टोक्यो के एक चिड़ियाघर के लिए भारतीय हाथी तोहफे में भेजा था। 1952 से दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिलेशंस शुरू हुए।

शिंजो आबे के भारत दौरे पर क्या होगा?

 

  • मोदी 13 सितंबर को अहमदाबाद में आबे की मेजबानी करेंगे। उसी दिन शाम को मोदी उन्हें साबरमती आश्रम लेकर जाएंगे। उनके सम्मान में डिनर भी देंगे।

  • 14 सितंबर की सुबह साबरमती रेलवे स्टेडियम में मोदी और आबे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए भूमिपूजन में हिस्सा लेंगे। यह प्रोजेक्ट 1.10 लाख करोड़ रुपए का है। आजादी के 75 साल पूरे होने पर 15 अगस्त 2022 को यह ट्रेन चलाने का टारगेट है।

  • मोदी-आबे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वड़ोदरा में हाई-स्पीड रेलवे ट्रेनिंग सेंटर का इनॉगरेशन करेंगे। गुरुवार दोपहर मोदी-आबे डांडी कुटीर संग्रहालय देखने जाएंगे।

  • इसके बाद गांधीनगर के महात्मा मंदिर में मोदी-आबे के बीच बातचीत होगी। इस बैठक में दोनों नेता भारत-जापान स्पेशल स्ट्रैटजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप के तहत हाल ही में हुई प्रोग्रेस का रिव्यू करेंगे। यह 12th इंडिया-जापान एनुअल समिट भी अहमदाबाद में होगी। मोदी-आबे के बीच यह चौथी समिट होगी।

  • गुजरात के साणंद और मंडल में जैपनीज इंडस्ट्रियल पार्क के लिए एमओयू होगा। इससे 25 हजार करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट आने की उम्मीद है। साणंद के खोराज में 1750 एकड़ में जापान-इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मैन्यूफैक्चरिंग बनाने के लिए भी एमओयू होगा। इसके तहत अगले 10 साल में 30 हजार यूथ्स को ट्रेनिंग मिलेगी।

  • आबे सूजुकी मोटर्स की एक कार फैक्ट्री और लीथियम-आयाेन बैटरी प्लांट का भी इनॉगरेशन करेंगे। गुरुवार को ही मोदी-आबे इंडिया-जापान बिजनेस फोरम में स्पीच देंगे। रात को सीएम विजय रूपाणी आबे के सम्मान में डिनर देंगे।

और क्या उम्मीद?

 

भारत-जापान के बीच मैरिटाइम सिक्युरिटी डील हो सकती है। नेवी के लिए US-2 सी-प्लेन मुहैया कराने की डील आगे बढ़ सकती है और सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में करार हो सकता है।

 

भारत के लिए जापान कितनी अहमियत रखता है?

 

  • चीन के साथ हालिया डोकलाम विवाद पर जब दुनिया के बड़े देश बैलेंस्ड कमेंट्स कर रहे थे, तब जापान ही वह देश था जिसने खुलकर भारत का सपोर्ट किया था।

  • बीते 10 साल से भारत में जापान से फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) छह गुना बढ़ा है। जापान भारत में तीसरा बड़ा इन्वेस्टर है। 2016-17 में जापान का भारत में इन्वेस्टमेंट 4.7 अरब डॉलर था। इसमें से 3.3 अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट गुजरात में था। भारत में जापान की 1200 कंपनियां ऑपरेट करती हैं।

  • जापान के साथ भारत का सिविल न्यूक्लियर एग्रीमेंट है। जापान भारत में न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में बड़े इन्वेस्टमेंट कर सकता है।

  • जापान भारत को कम कीमत पर 12 सी-प्लेन बेचेगा। ये इंडियन नेवी के लिए होंगे। ये ऐसे प्लेन होंगे जो समुद्र से उड़ान भर सकेंगे और समुद्र में लैंड कर सकेंगे। इस डील की कीमत 10 हजार करोड़ रुपए के आसपास है।

  • जापान ही वह अकेला देश है जिसे नॉर्थ ईस्ट और अंडमान निकोबार आईलैंड्स में इन्वेस्टमेंट की इजाजत है।

  • मोदी ने 2014 में पीएम बनने के बाद पड़ोसी देशों से बाहर जहां का दौरा किया था, वह जापान ही था।

बुलेट ट्रेन पर इतना जोर क्यों?

 

जापान के लिए: जापान इंडोनेशिया में इसी तरह का प्रोजेक्ट हासिल करना चाहता था, लेकिन वहां यह प्रोजेक्ट चीन को मिल गया। लिहाजा, जापान के लिए मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट अहम है।

 

भारत के लिए: माना जा रहा है कि बुलेट ट्रेन 160 साल पुरानी भारतीय रेल में नया रिवॉल्यूशन लाएगी। इसकी 98 हजार करोड़ रुपए की कॉस्ट पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन इसमें से जापान महज 0.1 इंट्रेस्ट रेट पर 50 साल के लिए करीब 88 हजार करोड़ रुपए का कर्ज दे रहा है। यानी ये बहुत सस्ता कर्ज है। मेक इन इंडिया के तहत देश में सस्ती बुलेट ट्रेनें बनेंगी। इससे इम्पोर्ट का पैसा बचेगा।

क्या चीन भी है दोनों देशों के बीच करीबी की वजह?

 

  • इंडियन ओशन रीजन में चीन का दखल बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए जापान को भारत जैसे देशों की जरूरत है। दूसरा, साउथ एशिया में भी चीन का दखल बढ़ रहा है। चीन श्रीलंका में एक बंदरगाह बना रहा है। नेपाल में बड़े पैमाने पर इन्वेस्टमेंट कर रहा है।

  • चीन वन बेल्ट, वन रोड प्रोजेक्ट (OBOR) के जरिए कई देशों को जोड़ रहा है। इसके जवाब में जापान एशिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर (AAGC) पर फोकस कर रहा है। इसमें भी उस भारत की जरूरत है।

  • भारत-जापान ने एशिया-अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर पर अफ्रीका में 2010 में बातचीत शुरू की थी। अफ्रीका में दोनों देशों के बड़े इन्वेस्टमेंट्स हैं।

  • चीन के OBOR के तहत फोकस रोड प्रोजेक्ट्स पर है, वहीं जापान के AAGC में फोकस एग्रीकल्चर, हेल्थ, टेक्नोलॉजी और डिजास्टर मैनेजमेंट पर है।

मोदी के पीएम बनने के बाद कितने बड़े देशों के नेता भारत आए?

 

  • नवंबर 2016 में ब्रिटेन की पीएम थेरेसा मे तीन दिन के भारत दौरे पर आईं।

  • अक्टूबर 2016 में रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन भारत आए।

  • दिसंबर 2015 में शिंजो आबे भारत आए। मोदी के साथ बनारस में गंगा आरती में शामिल हुए। तब मोदी ने बताया था कि रेल विकास के लिए जापान 10 अरब डॉलर की मदद देगा।

  • जनवरी 2015 में यूएस प्रेसिडेंट बराक ओबामा आए। रिपब्लिक-डे सेरेमनी में शामिल होने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने।

  • सितंबर 2014 में चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग तीन दिन के दौरे पर भारत आए। अहमदाबाद में मोदी ने उनका स्वागत किया।

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