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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

विमानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन साबित हो रहे ड्रोन का तोड़ सुरक्षा एजेंसियों ने खोज निकाला है। इजरायली तकनीक से बनी एक सिक्युरिटी डिवाइस एयरपोर्ट की सीमा लांघने वाले ड्रोन को वापस वहीं भेज देगी जहां से वह उड़कर आया था। इसी डिवाइस की मदद से सुरक्षा एजेंसियां उस शख्स तक भी पहुंचने में सफल हो पाएंगी, जो ड्रोन उड़ा रहा था।

 

डिवाइस का टेस्ट कामयाब रहा

सीआइएसएफ के सीनियर अफसर के मुताबिक, ड्रोन को कंट्रोल करने वाली डिवाइस का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर परीक्षण कामयाब रहा। जून तक इस डिवाइस को आइजीआइ समेत सभी प्रमुख एयरपोर्ट्स पर तैनात कर दिया जाएगा।

अभी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ने वाले ड्रोन को मार गिराना ही एकमात्र तरीका होता है। उसे ऑपरेट करने वाले शख्स तक पहुंचना करीब-करीब नामुमकिन है। एयरपोर्ट के अलावा ड्रोन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकते हैं। ड्रोन से कई संवेदनशील जगहों की जासूसी होने की आशंका बनी रहती है।

 

ऐसे पता चलेगा ड्रोन का रूट

यह सिक्युरिटी डिवाइस ड्रोन के कम्युनिकेशन सिस्टम को हैक कर उसे अपने कंट्रोल में ले लेगा। फिर ड्रोन को वापस उसी दिशा में जाने का कमांड देगा। कमांड मिलते ही ड्रोन वापस वहीं चला जाएगा, जहां से उसे उड़ाया गया था। ड्रोन के रूट को ट्रैक कर सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन उड़ाने वाले शख्स तक आसानी से पहुंच जाएंगी। ड्रोन का सारा डाटा भी यह डिवाइस आसानी से हासिल कर लेगी। आइजीआइ एयरपोर्ट पर बीते साल दो ऐसी घटनाएं हो चुकी है जिसमें ड्रोन की वजह से करीब दो घंटे तक प्लेन्स का ऑपरेशन पूरी तरह से रोकना पड़ा। इससे करीब तीन सौ फ्लाइट पर असर पड़ा था।

किसी बड़े विमान हादसे की वजह बन सकते हैं ड्रोन

ड्रोन से सबसे बड़ा खतरा विमानों को है। विमानों के इंजन इतने पावरफुल होते हैं कि वह 10 से 15 मीटर दूर उड़ रही किसी भी चीज को अपनी तरफ खींच सकते हैं। ऐसे में टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान अगर कोई ड्रोन, किसी प्लेन के इस दायरे में आता है तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है और सैकड़ों मुसाफिरों की जान को खतरा हो सकता है।

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