Salman Khan Helped Doctor Hathi

दि राइजिंग न्यूज

लखनऊ।

  • राज्यपाल को दिए शिकायती पत्र में कहा गया है कि एकेटीयू कुलपति विनय पाठक की पीएचडी में आइआइटी कानपुर के पूर्व निदेशक संजय गोविंद धांडे सह निर्देशक थे।
  • कोटा विश्वविद्यालय में विनय पाठक के कुलपति कार्यकाल में धांडे को मानद उपाधि दी गई।
  • वर्ष 2003 में बैंगलुरू और वर्ष 2004 में अहमदाबाद में अलग-अलग मंचों पर एक साथ पेपर प्रजेंट कर चुके हैं।
  • वर्ष 2014 में कोटा में एक इंजीनियरिंग संस्थान के विक्ट्री 2014 कार्यक्रम में धांडे मुख्य अतिथि थे वहीं विनय पाठक विशिष्ट अतिथि।  
  • उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति के चयन में धांडे ही कमेटी के चेयरमैन थे। इस कमेटी ने विनय पाठक का ही चयन किया।
  • बतौर एकेटीयू कुलपति विनय पाठक ने इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन का डीपीआर भी प्रो.धांडे से ही तैयार करवाया है। इसके लिए तकरीबन 2.5 लाख का शुरुआती भुगतान भी प्रो.धांडे को किया गया है। सूत्रों के मुताबिक बाद में तकरीबन 10 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
  • शैक्षिक सत्र 2016 के दीक्षांत समारोह में विनय पाठक प्रो.धांडे को ही मुख्य अतिथि बनाना चाहते थे लेकिन विरोध के बाद विनय पाठक को पीछे हटना पड़ा और एम.किरन कुमार बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किए गए।
  • मार्च 2016 में विनय पाठक ने प्रो.धांडे को एकेटीयू में सलाहकार बनाया।
  • एचबीटीयू में विनय पाठक कार्यवाहक कुलपति हैं और अपने किसी करीबी को ही कुर्सी पर बैठाना चाहते थे। संयोग है या साजिश की इस कमेटी में भी संजय गोविंद धांडे ही अध्यक्ष बनाए गए हैं।
  • इंदिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के कुलपति की चयन प्रक्रिया चल रही है। इस चयन समिति के तीन सदस्यों में एक संजय गोविंद धांडे हैं। चार लोगों ने कुलपति पद के लिए दावेदारी प्रस्तुत की है, इसमें एकेटीयू कुलपति विनय पाठक भी हैं। सूत्रों के मुताबिक विनय पाठक को सबसे योग्य साबित करने के लिए तर्क दिया जा रहा है कि इनके पास दो बार मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति बनने का अनुभव है। हालांकि यहां राह इतनी आसान नहीं प्रतीत हो रही है।

ये कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिन्हें किसी सुबूत की कसौटी पर खरा उतारने की जरूरत नहीं सिर्फ याददाश्त पर जोर डालना पर्याप्त होगा। इस पाठक-धांडे गठजोड़ में संजय गोविंद धांडे आइआइटी कानपुर में निदेशक रह चुके हैं और विनय पाठक डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। इग्नू का कुलपति बनने के लिए इन दिनों विनय पाठक ऐढ़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं। कुलपति बनने के लिए फर्जी अनुभव का आरोप भी विनय पाठक पर है, यह मामला माननीय उच्च न्यायालय में चल रहा है। विनय पाठक खुद को भारतीय जनता पार्टी के शीर्षस्थ नेता का करीबी बताते हैं। हालांकि सूत्र यह भी बताते हैं कि इग्नू का कुलपति बनने के लिए अब विनय पाठक शीर्षस्थ नेता के विरोधीजनों को नेताजी से दूरी होने की दुहाई देते घूम रहे हैं। शिक्षा के बाजारीकरण की यह एक भद्दी तस्वीर है। यदि ऐसा न होता तो यूपी में अनुभवी और वरिष्ठ गुरुजनों के होते हुए सत्ता के करीबी लोग कुलपति जैसे सम्माननीय पद पर न बैठ पाते। ऐसे कई उदाहरण आज समाज के सामने हैं। यह पहलू बाद में, आज बात सिर्फ इस गठजोड़ की।

इस गठजोड़ की शिकायत राज्यपाल राम नाईक से लिखित तौर पर की गई है। गोमती नगर के रहने वाले एक शिक्षाविद की फरियाद नौतनवां के विधायक अमन मणि त्रिपाठी ने महामहिम तक पहुंचाने का प्रयास किया है। शिकायत में यह साफ तौर पर लिखा गया है कि पाठक-धांडे गठजोड़ आज का नहीं बल्कि काफी पुराना है। विधायक अमन मणि त्रिपाठी ने महामहिम से अनुरोध किया है कि कुछ लोगों के कुत्सित प्रयासों के जरिए प्रदेश सरकार को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। इस शिकायती पत्र के कुछ बिंदुओं को ज्यों का त्यों आपके समक्ष रखने की कोशिश है। यहां बता दें कि दि राइजिंग न्यूज अपने मनमाफिक कुछ भी लिखकर हास्य का पात्र नहीं बनता, संस्थान अपनी जिम्मेदारी समझता है। विनय पाठक पर जो आरोप लगाए गए हैं वे अति गंभीर हैं –

  • एचबीटीआइ कानपुर को उच्चीकृत करते हुए एक सितंबर 2016 को हरकोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) में परिवर्तित कर दिया गया है। प्रो.एमजेड खान को पहला कुलपति नियुक्त किया गया लेकिन अर्हता पर सवाल उठने के बाद इन्हें हटा दिया गया। रिक्त पद का अतिरिक्त कार्यभार 24 मई 2017 को डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्याल के कुलपति विनय पाठक को दे दिया गया। विनय पाठक एचबीटीयू के ही कम्प्यूटर विभाग में आचार्य पद पर नियुक्त हैं और एकेटीयू में सेवा स्थानान्तरण के आधार पर प्रतिनियुक्ति पर हैं। विनय पाठक से कई वरिष्ठ शिक्षक एचबीटीयू में हैं लेकिन एक जूनियर को कार्यभार दिए जाने से वरिष्ठ शिक्षकों में रोष है। विनय पाठक ने अपने से वरिष्ठ शिक्षकों को कई अनरगल आदेश एवं चेतावनी जारी की हैं जो उच्च न्यायालय को संदर्भित किए गए हैं।
  • आरोप है कि विनय पाठक एचबीटीयू में अपना नियंत्रण चाहते हैं। एचबीटीयू में नियमित कुलपति नियुक्त करने के लिए सर्च कमेटी बनाई गई है। आरोप है कि विनय पाठक ने अपने पीएचडी के सह निर्देशक प्रो.धांडे को इस कमेटी का अध्यक्ष बनवाया है। इस गठजोड़ के कारण पांच माह तक सर्च कमेटी की संस्तुतियां राज्यपाल को भेजी नहीं गईं।
  • आरोप है कि धांडे औऱ विनय पाठक का उच्च स्तरीय शैक्षिक नियुक्तियां कराने का एक भ्रष्ट तंत्र है। आरोप यह भी लगाया गया है कि संभावित लोगों से संपर्क करके एक मोटी रकम वसूली जाती है और अयोग्य व्यक्तियों की संस्तुति करवा दी जाती है। पैनल में ऐसे नामों को भी रखा जाता है जिनका चयन नहीं होगा, इससे इनके द्वारा प्रायोजित व्यक्ति नियुक्ति पाने में सफल हो जाता है।

  • शिकायती पत्र में कहा गया है कि धांडे कांग्रेस शासन काल में प्रधानमंत्री के सलाहकार भी रह चुके है, इस कारण इनके सुझावों को मान्यता मिल जाती है। आरोप लगाया गया है कि विनय पाठक एक एजेंट के रूप में कार्य करते हैं।
  • शिकायती पत्र में कुलपति पद हेतु पांचों दावेदारों का जिक्र किया गया है और आरोप है कि इनमें से कुछ विनय पाठक द्वारा प्रायोजित हैं, या उनके खेल के किरदार हैं। इन्हीं में से एक से मोटी रकम वसूली जाएगी।  
  • राज्यपाल से मांग की गई है कि अति गोपनीय उच्च स्तरीय जांच कराकर संस्तुत पैनल को रद किया जाए। धांडे को हटाकर किसी अन्य को कमेटी का अध्यक्ष बनाया जाए।
  • शिकायती पत्र में कहा गया है कि विनय पाठक के भ्रष्टाचार तथा अनियमितता पर जांच चल रही है और कई प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन हैं। एचबीटीयू का अतिरिक्त कार्यभार विनय पाठक से लेकर वहीं के किसी वरिष्ठ शिक्षक को देने की मांग भी की गई है।

 

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