Baaghi 2 Assistant Director Name Came in Physical Assault

 

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक टीवी चैनल इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने देश में जाति केंद्रित राजनीति और लोकतंत्र पर खतरे जैसे सवालों का खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह की राजनीति के बजाय हमें एकता, विकास और दूरगामी भविष्य के मुद्दों पर राजनीति करनी चाहिए।

 

इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने अपनी आगामी दावोस यात्रा पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि विश्व के इतने बड़े आर्थिक केंद्र के मुखिया के मुंह से दुनिया कुछ सुनना चाहती है। देशवासियों ने जो तरक्की की है, जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उसे दुनिया के सामने रखने में मुझे गर्व महसूस होगा। वहीं इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने रोजगार और जीएसटी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों का भी जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि दावोस एक तरह से अर्थ जगत की बड़ी पंचायत बन गई है, जहां अर्थ जगत की बड़ी हस्तियां, नीति निर्माता शिरकत करते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही इसमें शामिल होने की इच्छा थी लेकिन जा नहीं पा रहा था। इस बार एशियान बैठक हो रही हैं और इसमें भारत प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।

 

जीएसटी पर ये कहा पीएम ने

जीएसटी को लेकर पूछे गए सवाल के संदर्भ में उन्होंने कहा कि गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए मैं जीएसटी का विरोध कर रहा था। तो मेरे साथ तमिलनाडु व अन्य राज्य भी उसके विरोध में थे। उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि तत्कालीन यूपीए सरकार जीएसटी को लेकर सभी राज्यों को संतुष्ट नहीं कर पाई थी। सत्ता में आने के बाद मैंने उन मुद्दों पर ध्यान दिया और सभी राज्यों को संतुष्ट किया।

चुनावों में लगातार प्रचार करने पर उन्होंने कहा कि मैं अपनी पार्टी को अपना समय नहीं दूंगा तो किसे दूंगा। मेरा समय मेरी पार्टी और देश के लिए ही है। उन्होंने इन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि उनकी पार्टी उनका इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि इससे मुझे एसी से बाहर निकलने का मौका मिलता है और मैं पहला ऐसा नेता हूं कि जिसने देश के 80 फीसदी जिलों में रातें बिताई हैं।

 

प्रधानमंत्री से जब सवाल पूछा गया कि आपने एक करोड़ रोजगार की बात की थी और श्रम मंत्रालय के अनुसार, हर साल केवल चार से पांच लाख रोजगार ही पैदा हो रहे हैं तो उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट के हवाले से कहा कि पिछले एक साल में संगठित क्षेत्र में 70 लाख ईपीएफ खाते खुले हैं। एक साल में 10 करोड़ लोगों ने मुद्रा योजना का लाभ लिया है। बाकी कुछ लोग आलोचना करना चाहते हैं तो कोई बात नहीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि अगर किसी कंपनी के बाहर कोई ठेले वाला दुकान लगाकर शाम को घर चला जाता है तो उसे किसी आंकड़े में शामिल नहीं किया जाता है।

प्रधानमंत्री ने खुद के बारे में भी कई बातें कहीं। उन्होंने यह बात मानी की दुनिया को उनके जैसे इंसान का खुलापन रास आया है। बजट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मोदी और भाजपा का केवल एक ही मंत्र है और वह है, विकास, विकास और विकास। वहीं 2019 को लेकर किए गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं चुनाव के हिसाब-किताब में समय नष्ट नहीं करता। जो भी करना है वह जनता करेगी। प्रधानमंत्री ने एक बार फिर से लोकसभा और विधानसभा चुनावों को साथ कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि त्योहारों की तरह चुनाव भी एक खास समय में होने चाहिए।

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