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दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

भारत कॉमनवेल्थ गेम्‍स में एक नई जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है। यह एक बहुपक्षीय समूह है जो भारत की वैश्विक आकांक्षाओं के लिए काफी अच्छा काम कर सकता है। कॉमनवेल्थ में चीन की मौजूदगी नहीं है ऐसे में भारत के पास मौका है कि वह मजबूत प्रतिनिधि के रूप में सामने आकर नेतृत्व कर सके।

भारत कॉमनवेल्थ को एक नया आयाम देने में मददगार साबित हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कॉमनवेल्थ में भारत के वित्तीय योगदान को लगभग दोगुना करने वाले हैं।

मोदी लंदन में कॉमनवेल्थ हेड्स गवर्नमेंट मीटिंग (सीएचओजीएम) में हिस्सा लेने वाले हैं। इससे यह संकेत दिया जाएगा कि भारत ज्यादा और बड़ी जिम्मेदारियां उठाने के लिए तैयार है। इससे भारत के कॉमनवेल्थ में महत्वपूर्ण शक्ति बनकर उभरने के आसार हैं। यह खबर भी है कि मोदी की मेजबानी के लिए ब्रिटेन ने खास इंतजाम किए हैं। जिसकी वजह से अटकलें हैं कि भारत को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। कॉमनवेल्थ से मिलने वाली बड़ी जिम्मेदारियों को लेकर दिल्ली में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

साल 2009 के बाद यह पहला मौका है जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री सीएचओजीएम में हिस्सा ले रहा है। माल्टा में हुई आखिरी समिट मोदी ने खुद ही छोड़ दी थी। ब्रिटेन में भारत के उप-उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा- भारत का प्रतिनिधित्व कई वैश्विक संगठनों में बढ़ा और कॉमनवेल्थ भी उनमें से एक है। कॉमनवेल्थ में शामिल एक सबसे बड़े देश के रूप में भारत अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नेतृत्व कर बड़ी भूमिका निभाने का इच्छुक है। उम्मीद है कि कॉमनवेल्थ में भारत की जिम्मेदारियां बढ़ेंगी।

लंदन में मोदी की द्वीपक्षीय वार्ता में महारानी एलिजाबेथ के एक दर्शक के तौर पर शामिल होंगी। महारानी संभवत: अपने आखिरी सीएचओजीएम समिट की मेजबानी कर रही हैं। यह अभी तक साफ नहीं हुआ है कि उनके बाद कॉमनवेल्थ का प्रमुख कौन बनेगा। माना जा रहा है कि नेताओं के साथ वाटरलू चैंबर में चर्चा के बाद इसका फैसला होगा और भारत के लिए यह महत्वपूर्ण अवसर है।

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