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दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

 

राजधानी की मुस्‍तैद पुलिस अपने काम को लेकर कितनी मुस्‍तैद है इसका नजारा उस समय देखने को मिला जब बाजारखाला थाना पुलिस और एकेटीयू कुलपति विनय कुमार पाठक के कारिंदे रामजीत गौतम को उठाकर थाने ले आए। यहां पर पीडि़त को कई घंटे जबरन बैठाए रखा गया। बातडीजीपी तक पहुंची तो पुलिस ने पीडि़त को छोड़ भी दिया। जब पीडि़त ने उच्‍च न्‍यायालय और एसएसपी दीपक कुमार को मामले से अवगत कराया तो कोर्ट ने पीडि़त को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए एसएसपी को आदेश दिए। हालांकि एसएसपी द्वारा आज भी कोई कार्रवाई नहींकी गई।इतना सब हो गया लेकिन बाजारखाला पुलिसकुलपति के रसूख के आगे पूरे मामले को काल्‍पनिक बताने पर तुली है। इतना ही नहीं तालकटोरा पुलिस, क्षेत्राधिकारी एलआइयू, आरआइ पुलिस लाइन और एसएसपी पीआरओ तक न्‍यायायल के आदेश को लेकर अनजान हैं। पुलिसिया दहशत के जो10 घंटे पीड़ित ने सहे उस पर पुलिस की बोलती क्यों बंद हैं, यह सवाल अब सहज ही उठाया जा रहा है।

 

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तालकटोरा थाना क्षेत्र के रहने वाले चंद्रेश कुमार ने डॉ. अब्‍दुल कलाम प्राविधिक विश्‍वविद्यालय (एकेटीयू) के कुलपति विनय कुमार पाठक के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाते हुए सीबीआइ जांच की मांग करते हुए न्‍यायालय में रिट दायर की। इसकी जानकारी जैसे ही कुलपति को हुई उसने चंद्रेश कुमार पर याचिका वापस करने का दबाव बनाया। जब चंद्रेश इसके लिए तैयार नहीं हुआ तो उसे धमकाना शुरू किया गया। सूत्रों के अनुसार मामला यहीं नहीं रुका जब चंद्रेश ने साफ शब्‍दों में अपनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया तो कुलपति विनय पाठक के खास माना जाने वाला सहायक कुलसचिव एकेटीयू राजीव कुमार सिंह (आरके सिंह), उनका गनर व कई लोग 16 दिसंबर को चंद्रेश के घर पर जा धमके। वह घर पर नहीं मिले तो ये लोग फिर 17, 18 और 19 दिसंबर 2017 को भी घर जाकर वहां मौजूद लोगों को धमकाते रहें। यहां पर जब चंद्रेश नहीं मिले तो कुलपति ने अपने रसूख के बल पर पुलिस अधिकारियों के साथ सेटिंग करते हुए बाजारखाला थाना क्षेत्र के मिल एरिया में रहने वाले उनके जीजा रामजीत गौतम के यहां आरके सिंह पुलिसकर्मियों और अन्‍य लोगों के साथ पहुंचा। यहां से रामजीत गौतम को पुलिस थाने ले आई और घंटों थाने में बिठाए रखा गया।

मामला एकेटीयू कुलपति विनय कुमार पाठक से जुड़ा था इसलिए पुलिस भी पूरी तरह से रसूखदारों का साथ देते हुए रामजीत को प्रताड़ित करती रही। चंद्रेश कुमार को जैसे ही घटना की जानकारी हुई उन्‍होंने डीजीपी तक मामला पहुंचाया। इसके बाद राजधानी की मुस्‍तैद पुलिस ने रामजीत को छोड़ा। इसके बाद चंद्रेश ने न्‍यायालय में एक शपथपत्र दाखिल किया जिसमें कुलपति विनय कुमार पाठक से अपनी जान की सुरक्षा करने, बाजारखाला पुलिस पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया। इसपर न्‍यायालय ने 22 दिसंबर 2017 को एसएसपी लखनऊ को आदेश दिया कि वह पीडि़त की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करे जिससे वह प्रताड़ना का शिकार ना हो। 

 

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न्‍यायालय द्वारा जारी हुए इस आदेश को 15 दिन से अधिक हो गया लेकिन अभी तक ना तो क्षेत्राधिकारी एलआईयू और ना ही आरआई पुलिस लाइन तक न्‍यायालय का आदेश पहुंचा। जिससे ना तो पीडि़त को सुरक्षा मिली और ना ही आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हो पाई।

एसएसपी को दिया पत्र गायब-

पीडि़त चंद्रेश कुमार ने एसएसपी दीपक कुमार को 20 दिसंबर 2017 को पूरे मामले से अवगत कराया। इसमें उन्‍होंने बाजारखाला में रहने वाले अपने जीजा रामजीत गौतम के साथ हुए घटनाक्रम को विस्‍तार से बताया। साथ ही बाजारखाला पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई,कुलपति विनय कुमार पाठक के रसूख को बताते हुए अपनी सुरक्षा की मांग की थी। साथ ही साथ एफआइआर दर्जकरने का निवेदन किया था। इसके बाद भी आठ जनवरी तक यह पत्र ना तो बाजारखाला पहुंचा और ना ही तालकटोरा थाने पहुंचा। जबकि एसएसपी पीआरओ संजय कुमार शिकायती पत्र को संबंधित थाने भेजे जाने का नियम बता रहे हैं।

 

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अपना ही बचाव कर रही पुलिस-

बाजारखाला एसएसआइ दयाशंकर द्विेदी ने ऐसी प्रकार होने से ही इनकार किया। चंद्रेश कुमार तालकटोरा के निवासी हैं इस लिहाज से एसएसआइ ने तालकटोरा थाने में एफआइआर होने की बात कहते हुए पीछा छुड़ा लिया तो वहीं मिल एरिया चौकी इंचार्ज राजेंद्र सिंह भी खुद को 15 से 20 दिसंबर तक अवकाश में होने का दावा कर रहे हैं। तालकटोरा इंस्‍पेक्‍टर उदय प्रताप सिंह मामला पूछने पर झंझला रहे हैं तो क्षेत्राधिकारी बाजारखाला अनिल कुमार यादव के अनुसार किसी भी थाने में एफआइआर या कोई दस्‍तावेज नहीं पहुंचा। इतना ही नहीं एसपी पश्चिम विकास चंद्र त्रिपाठी मामले को दिखाता हूं कह कर पल्‍ला झाड़ लिया।

“अभी तक चंद्रेश कुमार को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश नहीं मिला है। हो सकता है कि अभी आदेश कंप्‍यूटर में अपलोड ना हुआ हो। जैसे ही न्‍यायालय का आदेश मिलेगा कार्रवाई की जाएगी।”

राधेश्‍याम राय

क्षेत्राधिकारी एलआइयू

 

“यदि पीडि़त ने एसएसपी से शिकायत की है तो उसे संबंधित थाने भेज दिया जाता है। अब चंद्रेश कुमार की फाइल कहां गई बता नहीं सकते है।”

संजय

एसएसपी पीआरओ

कुलपति विनय पाठक पर अन्य आरोप

विनय पाठक ने प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य ऐसे हाथों में सौंप दिया है जिस पर भ्रष्टाचार के दर्जनों मामले चल रहे हैं।

विनय पाठक पर भी फर्जी अनुभव दिखाने का आरोप है, इस मामले में कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। विनय पाठक पर अन्य आरोप भी लगते रहे हैं।

उत्तराखंड विवि में कार्यकाल के दौरान विनय पाठक पर अपने चहेतों को नौकरी देने का आरोप लगा।

जिन लोगों को पाठक ने उत्तराखंड में नौकरी दी उन्हीं लोगों को कोटा में भी पाठक ने अपने कार्यकाल में नियुक्त किया। अब इनमें से कई चेहरे एकेटीयू में भी दिखाई देते हैं।

लिखित परीक्षा के नाम पर पारदर्शिता करने के ढोंग का आरोप भी विनय पाठक पर लग चुका है, इसकी लिखित शिकायत भी शासन और प्रधानमंत्री कार्यालय को की जा चुकी है।

पाठक पर आरोप है कि अनुभव में हेराफेरी करके इन्होंने कुलपति पद हासिल किया।

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