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दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

आधार कार्ड के डाटा में सेंध लगाने की खबर छापने वाले अखबार व उसकी रिपोर्टर पर एफआइआर के मामले में यूआइडीएआइ ने अपनी सफाई दी है। यूआइडीआइ ने आधार की जानकारी आसानी से लीक होने की खबर छापने पर “द ट्रिब्यून” और उसकी रिपोर्टर रचना खैरा के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है।

 

यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने कहा है कि इस मामले में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि व्हिसलब्लोअर के खिलाफ कदम उठाया गया है। यह कहना सही नहीं है कि हमने “शूटिंग द मैसेंजर” की नीति को अपनाया है।

 

 

यूआइडीएआइ का कहना है कि भले ही इस मामले में आधार से संबंधित जानकारियों में सेंध न लगाई गई हो, पर UIDAI हर आपराधिक मामले को काफी गंभीरता से लेता है। इस मामले में अनधिकारिक सेंध लगाने की कोशिश के तहत आपराधिक प्रक्रिया शुरू की गई है।

 

यूआइडीएआइ ने आगे कहा है कि वह मीडिया की आजादी में यकीन रखता है। इससे पहले, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इस मामले में अखबार और रिपोर्टर पर एफआइआर किए जाने की आलोचना की थी।

 

 

इस मामले में यूआइडीएआइ का कहना है कि एक अपराध के लिए एफआइआर दर्ज करवानी जरूरी है। इसके लिए आपको पूरे मामले की जानकारी देनी होती है और इसमें शामिल लोगों के नाम भी बताने होते है।

 

यूआइडीएआइ का कहना है, एफआइआर में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित शख्स अपराधी है। इस मामले में यूआइडीएआइ ने चार जनवरी को शिकायत दी थी। इसके अगले दिन एफआइआर दर्ज की गई। इस मामले में कोई अपराधी है या नहीं यह तो पुलिस जांच और मुकदमे के बाद ही पता चलेगा।

 

 

यह एफआइआर आइपीसी की धारा 419 (वेश बदलकर धोखा देने), धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 468 (जालसाजी) और धारा 471 (फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल) और आइटी एक्ट की धारा 66 और आधार एक्ट की धारा 36/37 में दर्ज की गई है।

 

द ट्रिब्यून की खबर के प्रकाशित होने के बाद यूआइडीएआइ ने कहा था कि बायोमैट्रिक डाटा हासिल करने की खबर झूठी थी। यूआइडीएआइ के चंडीगढ़ स्थित दफ्तर ने “द ट्रिब्यून” से सवाल भी पूछे हैं।

 

 

यूआइडीएआइ ने पूछा कि क्या उसके रिपोर्टर ने किसी के फिंगर प्रिंट या आंखों की पुतलियों का रिकॉर्ड देखा था या हासिल किया था? अखबार के पत्रकार ने कितने आधार नंबरों की जानकारी ली थी और ये आधार नंबर किन-किन के थे?

 

“द ट्रिब्यून” ने दावा किया था कि उसने एक व्हाट्सएप ग्रुप से मात्र 500 रुपये में आधार का डाटा हासिल करने वाली सर्विस खरीदी और उनको करीब 100 करोड़ आधार कार्ड का एक्सेस मिल गया। इसके बाद 300 रुपये अधिक देने पर उन्हें उस आधार कार्ड की जानकारी को प्रिंट करवाने का भी एक्सेस मिल गया। इसके लिए अलग से एक सॉफ्टवेयर था। अखबार ने कहा कि इस दौरान उनको लोगों के नाम, पता, पिन कोड, फोटो, फोन नंबर और ईमेल आइडी की जानकारी मिली थी।

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