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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।  

 

देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को नोटबंदी को संगठित लूट करार दे दिया। इस पर बीजेपी ने भी पलटवार किया है। सरकार और पार्टी की ओर से मोर्चा संभालते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा- इसको लूट कहना, एटीं ब्लैकमनी ड्राइव- एक इथीकल ड्राइव है। लूट तो वो होती है जो टूजी, कॉमनवेल्थ गेम्स, कोल ब्लॉक आवंटन में हुई। इसलिए मुझे लगता है कि इथिक्स के मामले में कांग्रेस और हमारा दृष्टिकोण एकदम अलग है। उनका मूल काम एक परिवार की सेवा करना, हमारे देश की सेवा करना है।

जेटली के जवाब

 

  • मनमोहन सिंह का सवालः जीएसटी छोटे कारोबारियों के लिए बुरे सपना जैसा बन गया है। नोटबंदी की तरह ही जीएसटी को लेकर भी बार-बार नियम बदलने से दिक्कत बढ़ी है। इससे टैक्स टेरिरिज्म बढ़ा है।

  • जेटली का जवाबः पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के जीएसटी को टैक्स टेररिज्म बताया था। इस पर जेटली ने कहा- जो सिस्टम टैक्स चोरी को रोकने का काम कर रहा हो, वह आतंकवाद कैसे हो सकता है।

  • मनमोहन सिंह का सवालः ग्लोबल कंडीशन अच्छा होने के बाद भी हम इसका फायदा नहीं उठा सके। 25 साल की ग्रोथ धीमी है। मुझे दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि केंद्र सरकार अपनी ड्यूटी निभाने में असफल रही है।

  • जेटली का जवाबः जेटली ने कहा कि मनमोहन सिंह को अंतरराष्ट्रीय रूप से भारत की अर्थव्यवस्था की तुलना करनी चाहिए। एक 2014 से पहले और 2014 के बाद। 2014 से पहले सरकार में फैसला लेने की कमी थी, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा था।

  • मनमोहन सिंह का सवालः नोटबंदी लागू करने से पहले पीएम ने क्या एक बार भी गरीबों के बारे में सोचा? इसके फायदे के बारे में सोचा?

  • जेटली का जवाबः वित्त मंत्री ने कहा कि नोटबंदी लागू करने से पहले जो तैयारी होने चाहिए थी, सरकार ने पूरी तैयारी की थी।

गरीबी खत्म करने के दावे बनाम ढांचागत सुधार

 

  • मनमोहन सिंह- हमने 14 मिलियन लोगों को अपने कार्यकाल के दौरान गरीबी से मुक्त कराया।

  • जेटली- दस साल तक एक पॉलिसी पैरालेसिस, कुछ न करना, ऐसी हुकुमत चलाना। पीएम ने एक ढांचागत सुधार कर, बदलाव लाने का प्रयास किया है। यूपीए और एनडीए में एक तरफ पॉलिसी पैरालाइसिस और एक तरफ ढांचागत सुधार हुआ।

मनमोहन ने क्या कहा था?

 

मनमोहन सिंह ने पीएम मोदी पर सीधा वार करते हुए कहा कि नोटबंदी के फैसले को लोगों पर थोपा गया था। जब नोटबंदी का ऐलान हुआ तो ये सुनते ही मुझे झटका लगा था। क्या जीडीपी और नोटबंदी पर सवाल करने वाला एंटी नेशनल हो जाता है। नोटबंदी एक तरह की संगठित लूट थी।

बैंक में पैसा आने से उसकी मालकियत का पता चला

 

जेटली ने कहा- लोगों ने सारा पैसा बैंक में डिपोजिट किया, अच्छा हुआ डिपोजिट किया। कैश सिस्टम में आने से उसकी मालकियत किसकी है पता चल जाती है। डेटा माइनिंग के जरिए 1।8 मिलियन लोग वो पहचाने गए जिनको जवाब देना पड़ा। इसलिए सिर्फ बैंक में चले जाना उससे नोटबंदी की सफलता और विपलता पर असर नहीं पड़ता। भारत को लेस कैश इकोनॉमी, हायर टैक्स पे, हायर डिजिटल इकोनॉमी बनाना ही लक्ष्य है।

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