Mallika Dua Slams Speaking on Pulwama Terror Attack

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

आचार संहिता की धज्जियां उड़ाने वाले नेताओं-पार्टियों पर लगाम लगाने के लिए चुनाव आयोग ने इस बार डिजिटल माध्यम का सहारा लिया है। मंगलवार को आयोग द्वरा एक एंड्रायड एप लॉन्च किया गया। इस एप का इस्तेमाल र कोई भी व्यक्ति बिना अपनी पहचान सार्वजनिक किए कर सकता है। आयोग का उद्देश्य है कि चुनावों के दौरान अवैध रूप से बांटे जा रहे धन या नफरती भाषणों जैसी हरकतों पर लगाम लगाई जा सके। इंटरनेट आधारित इस बीटा वर्जन एप का नाम “सीविजिल” है। यहां “सी” का अर्थ नागरिकों से है।

 

इन चुनावों से होगी इस एप की शुरुआत

इसका पहली बार इस्तेमाल इस साल के अंत में होने वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ राज्यों के विधानसभा चुनावों में होगा। इस गूगल प्ले स्टोर पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह एप केवल उस दौरान काम करेगा जब चुनावी राज्यों में आदर्श आचार संहित (एमसीसी) लागू रहेगी।

शिकायतकर्ता की पहचान नहीं होगी उजागर

आयोग ने कहा कि वह शिकायतकर्ता के फोन नंबर और पहचान को छुपा देगा ताकि रसूखदार और ताकतवर लोगों के खिलाफ लोग जानकारियां देने का साहस करें। वहीं जो लोग अपनी पहचान नहीं छुपाएंगे उन्हें शिकायत पर कार्रवाई के बाद चुनाव आयोग से जवाब देगा।

 

जीपीएस से सर्च होगी लोकेशन

मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि सबूत आधारित शिकायत का समयबद्ध निस्तारण करने के लिये अधिकतम 100 मिनट की समयसीमा तय की गई है। उन्होंने बताया कि जीपीएस की मदद से शिकायत वाले स्थान की पहचान कर संबद्ध क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी उक्त स्थान पर पहुंच कर कार्रवाई करेंगे।

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