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दि राइजिंग न्यूज़

काठमांडू।

 

सिक्किम सेक्टर में डोकलाम पर चीन से जारी विवाद के बीच देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भूटान के विदेश मंत्री से मुलाकात की। सुषमा यहां बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कॉरपोरेशन इन साउथ एशिया एंड साउथ ईस्ट एशिया (BIMSTEC) में शिरकत करने पहुंचीं। हालांकि, भूटान के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने कहा कि इस मुलाकात का मकसद आपसी सहयोग बढ़ाना है। भारत मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स की सेक्रेटरी प्रीति सरन ने कहा कि मुलाकात बेहद पॉजिटिव माहौल में हुई।

बता दें कि चीन सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में सड़क बना रहा है। डोकलाम के पठार में ही चीन, सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं। इस इलाके में चीन और भारत की सेनाएं करीब दो महीने से आमने सामने हैं।

 

कौन-कौन शामिल हैं BIMSTEC में...

 

साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशिया में सहयोग बढ़ाने के लिए BIMSTEC बनाया गया था।

BIMSTEC में बांग्लादेश, इंडिया, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं।

 

विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, "करीबी दोस्त और पड़ोसी से मिलने का वक्त। विदेश मंत्री ने भूटान के फॉरेन मिनिस्टर दामेचो दोरजी से मुलाकात की।"

डोकलाम हमारा है- भूटान

 

बता दें कि डोकलाम पर जारी विवाद के बीच पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) ने कहा है कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, भूटान की तरफ से पहली बार इस मामले में कोई रिएक्शन सामने आया।

 

भूटान के ऑफिशियल सोर्सेस ने न्यूज एजेंसी एएनआई से शुक्रवार को कहा- हमने डोकलाम मुद्दे पर चीन को मैसेज भेज दिया है। हमने कहा है कि चीन हमारे इलाके में सड़क बनाने की कोशिश कर रहा है। ये दोनों देशों के बीच 1988 और 1998 में हुए समझौतों का वॉयलेशन है।

किसे मिली है डोकलाम इलाके की जिम्मेदारी?

 

सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस एंड स्ट्रैटजी की रिसर्च फैलो नम्रता हसिजा ने DainikBhaskar.com को बताया- यह कहना गलत नहीं होगा कि PLA का इरादा डोकलाम में ‘आर्म्ड क्नफ्लिक्ट’ का है। इसकी जिम्मेदारी PLA की वेस्टर्न थिएटर कमांड को दी गई है। PLA के एक तिहाई सैनिक इसी कमांड में तैनात हैं।

 

नम्रता के मुताबिक, पूरी कमांड भारत से टकराव नहीं बढ़ाएगी, बल्कि उसकी एक टुकड़ी ऐसा कर सकती है। वेस्टर्न थिएटर कमांड इंडिया से लगे बॉर्डर पर तैनात है। इसमें तिब्बत, लद्दाख, अरुणाचल और सिक्किम के साथ अक्साई चीन आता है।

ऊंचाई पर स्थित चौकियों पर तेजी से सैनिक की तैनाती करना, रिसोर्सेस पहुंचाना, तिब्बत और लद्दाख में ट्रेनिंग हासिल कर चुके फौजियों को भेजना वेस्टर्न थिएटर कमांड के जिम्मे है।

 

बता दें कि रिसर्च फैलो नम्रता इससे पहले इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड क्नफ्लिक्ट स्टडीज में सीनियर रिसर्च ऑफिसर थीं। इंडिया-ताइवान रिलेशन और चाइनीज़ फॉरेन पॉलिसी पर कई सालों से लगातार काम कर रही हैं।

अगस्त-सितंबर में खतरा क्यों?

 

नम्रता के मुताबिक, उन्हीं के सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस एंड स्ट्रैटजी के प्रेसिडेंट जयदेव रानडे ने एक साल पहले ही बता दिया था कि दोनों देशों के बीच जो तनाव है, उसे देखते हुए 2017 में अगस्त-सितंबर के बीच चीन भारत से टकराव बढ़ा सकता है।

 

वे कहती हैं- दरअसल, चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड बीते एक साल से भारत से लगे बॉर्डर पर नए कंस्ट्रक्शन्स कर रही है ताकि जरूरत पड़ने या विवाद बढ़ने पर जल्द से जल्द और पूरी ताकत से जवाब दिया जा सके। चीन से आई रिपोर्ट्स देखने पर पता चलता है कि टकराव का माहौल बीते सालभर से बनाया जा रहा है। एक तरफ फॉरेन ट्रेड और डिप्लोमैटिक बातचीत के रास्ते खुले हैं, दूसरी तरफ PLA पहले से ज्यादा अग्रेसिवली रिएक्ट करते हुए घुसपैठ कर रही है। इंटरनेशनल लेवल पर भारत के लिए मुश्किलें खड़ी करना भी चीन के इसी प्लान का हिस्सा है।

क्यों जानबूझकर उलझ रहा है चीन?

 

सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस एंड स्ट्रैटजी के मुताबिक, चीन के पास भारत से उलझने के तीन कारण हैं। वन बेल्ट-वन रोड प्रोजेक्ट से भारत का खुद को अलग कर लेना पहला बड़ा कारण है। इससे चीन को बड़ा नुकसान हुआ है। दूसरा, अमेरिका से भारत की नजदीकी चीन को खलती है। वो भी अमेरिका को आंखें दिखाता है।

भूटान को क्यों करनी होगी पहल?

 

थिंक टैंक के मुताबिक, तीसरा और ताजा कारण भूटान का डोकलाम सीमा विवाद है। 16 जून को पीएलए डोकलाम इलाके में घुसी और सड़क बनाना शुरू की।

 

रॉयल भूटान आर्मी की पेट्रोल ने उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन जब चीन नहीं माना तो भूटान के कहने पर इंडियन आर्मी वहां पहुंची। इंडियन आर्मी बिना देर किए डोकलाम पहुंचेगी, ये अंदाजा चीन को नहीं था। चीन इसे अपना इलाका मानता है, जबकि भारत भूटान के साथ हुई ट्रीटी के कारण वहां मौजूद है। ये चीन को पसंद नहीं क्योंकि इससे ट्राई-जंक्शन तक सड़क बनाने का प्रोजेक्ट रुक गया है, जो अरुणाचल पर उनके दावे को मजबूती देने वाला था।

चूंकि भारत भूटान के लिए वहां मौजूद है, इसलिए डोकलाम विवाद का हल भूटान की पहल से ही निकल सकता है।

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