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तलवार परिवार की जान थी आरुषि…पढ़िए उसकी कहानी

Home | 12-Oct-2017 17:00:18
Details about Aarushi Talwar

दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

बेटियां कितनी प्‍यारी होती हैं ये बताने की जरूरत नहीं। आरुषि तलवार भी अपने परिवार की जान थी। बेहद चंचल, शरारती और शालीन भी। 

बहुचर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. राजेश और नूपुर तलवार को बरी कर दिया है। ऐसे में एक बार फिर ताजा हो गईं नन्‍ही आरुषि की यादें। 

आरुषि के जानने वाले और रिश्‍तेदार उसके बारे में कहते हैं कि वह पढ़ाई दिल लगाकर करती थी। स्‍वभाव से चंचल थी तो कई दोस्‍त भी थे उसके। 


 

शादी के करीब चार साल बाद दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में नूपुर तलवार ने एक बेटी को जन्‍म दिया, नाम रखा आरुषि। उस समय तलवार दंपति साउथ दिल्ली के एक अपार्टमेंट में रहते थे, लेकिन आरुषि के पैदा होने के बाद नोएडा के जलवायु विहार में शिफ्ट हो गए। नूपुर की मां यही रहती थीं। दोनों वर्किंग थे, ऐसे में आरुषि की देखभाल का जिम्मा नानी का ही था।

 

 

ननिहाल में बड़ी नाज़ों से पली थी आरुषि

नानी ने अपनी नातिन को बड़े नाज़ों से पाला था। वह बताती हैं कि आरुषि पढ़ने में बहुत तेज थी। माता-पिता के क्लिनिक चले जाने के बाद वह नानी के घर आ जाती थी। शाम को वापस आते वक्त नूपुर उसे नानी के घर से लेकर आती थीं।

 

डॉ राजेश कभी नहीं चाहते थे कि उनकी बच्ची किसी आया के हाथों पले-बढ़े इसलिए ही वे नोएडा शिफ्ट हुए थे। वह चाहते थे कि आरुषि नानी के पास रहे और वह उसका ख्याल रखें। नूपुर और राजेश के जीवन का मकसद ही आरुषि थी। उन्होंने उसे कभी अकेला नहीं छोड़ा था। आरुषि जब पैदा हुई तभी से उसके अंदर कुछ अलग टैलेंट था। बेहद समझदार और संवेदनशील।

 

 

दोस्‍त की मृत्‍यु पर कई दिनों तक बहाए थे आंसू

छोटी उम्र में ही आरुषि में बेहद संवेदनाएं बसती थीं। उसकी दोस्‍त थी गज़ल। एक दुर्घटना में गजल की मौत हो गई। आरुषि सहेली को खोने का गम बर्दाश्‍त नहीं कर पाई थी। कई दिनों तक रोई और स्‍कूल भी नहीं गई। फिर स्कूल में गजल के नाम का एक पौधा लगवा दिया गया, ताकि उसे उसका एहसास रहे। आरुषि अपने हाथों से उस पौधे को पानी देती थी। जैसे-जैसे पेड़ बढ़ रहा था, वह कहती देखो गजल अब बड़ी हो रही है, वह तो मेरे साथ बात करती है।

 

 

एमटीवी की फैन थी

आरुषि अपने मम्मी के साथ बहुत अटैच थी। स्कूल से आने के बाद वह नानी के घर जाती थी। खाना खाने के बाद वह तुरंत पढ़ने बैठ जाती थी। टीवी कम ही देखती थी, लेकिन उसे एमटीवी के म्युजिक शो बहुत पसंद थे। वह टीवी पर गाना सुनकर डांस किया करती थी। शाम को दूध पीने के बाद पड़ोस में खेलने चली जाती थी। शाम को नूपुर उसे ले जाती थीं।

 

 

पूरा मामला जानिए

बता दें कि आरुषि-हेमराज हत्‍याकांड में फंसे तलवार दंपति ने सीबीआइ कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। 26 नवंबर, 2013 को उनको सीबीआइ कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तलवार दंपति अब तक गाजियाबाद के डासना जेल में सजा काट रहे थे। कल वह संभवत: बरी हो जाएंगे।

 

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