Deepika Padukone Turns As A Relative Of Arjun and Sonam After Marrying Ranveer Singh

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जीतने के बाद दिल्ली की केजरीवाल सरकार फौरन हरकत में आ गई है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि दिल्ली सरकार के सभी फैसले उपराज्यपाल पर बाध्य होंगे। इसके बाद दिल्ली सरकार ने अहम बैठक बुलाई जिसमें कई फैसले लिए गए।

 

फैसला आने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सचिवालय पर कैबिनेट की बैठक बुलाई, जिसमें सभी मंत्रियों के विभागों में लंबित पड़े कामकाज से जुड़ी फाइलों को तलब किया गया। हालांकि बीजेपी की ओर से इसे आप सरकार की हार बताया गया।

ट्रांसफर पोस्टिंग की ताकत अब CM के पास

इसके बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पीसी कर बताया कि फैसले के तुरंत बाद अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग की ताकत मुख्यमंत्री के हाथों में फिर से आ गई है। उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने पीसी में कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत ने जो फैसला दिया है उसके बारे में थोड़ी देर पहले कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में कानून मंत्री कैलाश गहलोत ने उस फैसले को कैबिनेट के समक्ष रखा। कैबिनेट में मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई, इसके बाद सरकार की ओर से निर्देश दिए गए कि इसी फैसले के अनुरूप काम होंगे। उन्होंने आगे कहा कि कैबिनेट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि राशन की घर-घर डिलीवरी और सीसीटीवी का काम तुरंत शुरू किया जाए।

 

उन्होंने कहा, “2 साल पहले हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली सरकार से ट्रांसफर पोस्टिंग की ताकत छीनकर उपराज्यपाल और मुख्य सचिव को दे दी गई थी। बतौर सर्विसेस विभाग का मंत्री मैंने आदेश जारी किया है कि इस व्यवस्था को बदलकर आईएएस और दानिक्स समेत तमाम अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग की ताकत अब मुख्यमंत्री की अनुमति से लेने होंगे।”

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग की पूरी व्यवस्था बदल दी गई है। तत्काल प्रभाव से यह व्यवस्था लागू करने के आदेश सर्विसेस विभाग को जारी कर दिया गया है।

 

LG ने कानून की गलत व्याख्या कीः मनीष

सिसोदिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन विषयों को छोड़कर सारे विषयों पर अधिकार दिल्ली की चुनी हुई सरकार को दे दिया है। ट्रांसफर पोस्टिंग सर्विसेज का मामला उन तीन विषयों में नहीं आता इसलिए अब यह शक्तियां फिर से दिल्ली सरकार को मिल गई हैं। सर्विसेज विभाग अब चुनी हुई सरकार के पास रहेगी।

 

उन्होंने कोर्ट के फैसले पर स्थिति साफ करते हुए कहा कि जमीन, पुलिस और पब्लिक ऑर्डर छोड़कर सभी मसलों पर कानून बनाने का अधिकार दिल्ली सरकार और दिल्ली विधानसभा के पास रहेगा। मोदी सरकार और उपराज्यपाल ने मौजूदा कानून की गलत व्याख्या कर हमारे अधिकारों को कम किया।

फैसले के बाद भविष्य में उपराज्यपाल के साथ विवाद न हो, इसके लिए सिसोदिया ने कहा कि तीन रिजर्व मामलों को छोड़कर उपराज्यपाल किसी मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। इन तीन मसलों पर कानून केंद्र सरकार बना सकती है बाकी सारे मसलों में कानून दिल्ली की सरकार बनाएगी।

 

सरकार फिर से सक्रिय

इससे पहले मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ट्वीट कर बैठक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली सरकार के सभी विभागों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरुप काम करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही जल्द राशन और सीसीटीवी को घर तक पहुंचाने का काम शुरू करने को कहा गया।

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