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दि राइजिंग न्यूज़

अगरतला।

 

त्रिपुरा में 70 सालों में पहली बार भाजपा की सरकार सत्ता में आई है। इसके बाद राज्य में लेनिन की मूर्ति ढहाने जाने के मसले ने अब तूल पकड़ लिया है। राज्य में पिछले 25 सालों से सत्ता पर काबिज रही सीपीआइ (एम) ने ऐलान किया है कि वह त्रिपरा में बढ़ती हिंसा की घटनाओं की वजह से 12 मार्च को जनजातीय सुरक्षित सीट चारीलम विधानसभा पर होने वाले चुनाव से अपना नाम वापस लेगी।

 

सीपीआइ (एम) राज्य की सत्ता में आई भाजपा सरकार पर कथित तौर पर आरोप लगाया है कि उसकी वजह से राज्य में हिंसा की घटनाएं हुई। सीपीआइ (एम) प्रवक्ता गौतम दास ने कहा कि राज्य समिति की बैठक के बाद पार्टी ने यह फैसला लिया है। इस बैठक में महासचिव सीताराम येचुरी भी शामिल हुए थे।

इस मामले में सीपीआइ (एम) राज्य सेक्रेटरी बिजन धर ने चुनाव आयोग अधिकारी को एक पत्र लिख पार्टी के निर्णय के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने पत्र में आगे कहा कि राज्य में सामान्य हालात की बहाली तक चुनाव स्थगन की हमारी अपील पर आयोग ने विचार नहीं किया।

 

बता दें कि प्रदेश की 60 सदस्यीय विधानसभा की 59 सीटों पर 18 फरवरी को मतदान हुए थे लेकिन चारीलम विधानसभा सीट पर माकपा उम्मीदवार नारायण देबबर्मा का निधन हो जाने से मतदान स्थगित कर दिया गया था। देबबर्मा की मौत 11 फरवरी को चुनावी अभियान के दौरान कार्डियक अरेस्ट पड़ने की वजह से हुई थी।

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