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गुजरात चुनाव का ऐलान न होने पर कांग्रेस का बड़ा आरोप!

Home | 12-Oct-2017 10:30:33 | Posted by - Admin
  • कहा- ईसी पर दबाव बना रही मोदी सरकार
   
Congress Raises Questions on Bjp over Gujarat Election Announcement

दि राइजिंग न्‍यूज

नई दिल्‍ली।

 

गुरुवार को चुनाव आयोग के हिमाचल के साथ गुजरात विधानसभा का चुनाव न कराने पर कांग्रेस ने सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस पर सवाल उठाया है।

उन्होंने पूछा कि क्या गुजरात विधानसभा चुनाव की घोषणा इसलिए नहीं हो रही है, क्योंकि प्रधानमंत्री 16 अक्तूबर को वहां लुभावने चुनावी वादे करने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार चुनाव आयोग पर दबाव डालकर चुनाव टालना चाहती है।

 

नीलांजन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने इस बात पर नाखुशी जाहिर की थी कि लंबे चुनावी शेड्यूल की वजह से विकास कार्यों पर असर पड़ता है क्योंकि चुनावी अधिसूचना जारी रहती है। पीएम मोदी इस समय “वन नेशन, वन इलेक्शन” कैंपेन की वकालत करते रहे हैं, उसके मूल में भी उनकी यही सोच है। हालांकि मतगणना हिमाचल और गुजरात दोनों की एक साथ 18 दिसंबर को होगी।

 

वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले से हिमाचल प्रदेश में अधिसूचना लागू हो जाएगी, जबकि गुजरात की सरकार को थोड़ा समय और मिल जाएगा ताकि अगर वो चाहे तो लोगों को लाभ के लिए अहम घोषणाएं कर सके।

 

कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने चुनाव आयोग के फैसले पर हैरानी जताई और कहा कि आयोग का निर्णय समझ से परे हैं। अगर गुजरात में चुनाव में देरी होगी तो सत्ता में जो पार्टी है उसे जनता को लुभाने के लिए आधारहीन और गैरजरूरी लोकलुभावन घोषणाएं करने का वक्त मिल जाएगा जो चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

 

हालांकि बीजेपी प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम ने चुनाव आयोग के फैसले का बचाव किया और कहा कि दोनों राज्यों के चुनाव साथ घोषित नहीं हो सकते क्योंकि हिमाचल विधानसभा का सत्र सात जनवरी को खत्म होगा जबकि गुजरात का 21 जनवरी को होगा। उन्होंने कहा कि लोकलुभावन घोषणाएं तो कोई भी सरकार पहले भी कर सकती है। उसके लिए अंतिम दिनों का इंतजार करने की जरूरत नहीं रहती।

 

वीरभद्र के नेतृत्‍व में ही चुनाव में उतरेगी कांग्रेस

तमाम विवादों और किंतु-परंतु के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। राज्य का रिकॉर्ड छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र के लिए जहां एक ओर सत्ता बचाए रखने की चुनौती है तो दूसरी ओर 7वीं बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर भी।

 

हिमाचल में पिछले कुछ दशकों से हर बार सत्ता विरोधी लहर के कारण सत्ता में परिवर्तन का ट्रेंड रहा है। ऐसे में सत्ता बचाने के लिए वीरभद्र को सत्ता विरोधी रुझान से पार पाना होगा। वह भी तब जब वह खुद और उनके परिवार के सदस्य भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं।

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