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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

बिहार के मुजफ्फरपुर और उत्तर प्रदेश के देवरिया में बालिका गृहों में बच्चियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न मामले को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने देशभर के 9000 संस्थानों की सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण) का आदेश दिया है, जहां अनाथ और मां-बाप द्वारा छो़ड़ दिए गए बच्चों को रखा जाता है। यह रिपोर्ट अगले दो महीनों में जमा की जानी है।

 

मेनका गांधी ने तैयार किया है प्रोफार्मा

महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा “मैंने राष्ट्रीय बाल संरक्षण संरक्षण आयोग से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि अगले 60 दिनों के भीतर सभी बाल देखभाल (चाइल्ड केयर) संस्थानों की सोशल ऑडिट पूरी हो जानी चाहिए। मैंने खुद इसके लिए प्रोफार्मा (प्रपत्र) तैयार किया है।”

इस बात की भी होगी जांच

उन्होंने कहा कि ऑडिट के लिए नया प्रोफार्मा केवल बच्चों की संख्या, बिस्तरों और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता के लिए ही नहीं, बल्कि बाल गृहों को चला रहे लोगों की पृष्ठभूमि की जांच और वहां रह रहे बच्चों की हालत की जांच के लिए भी तैयार किया गया है।

 

आश्रय गृहों का होगा केंद्रीयकरण

मेनका गांधी ने कहा कि देशभर में चल रहे सभी आश्रय गृहों का अब केंद्रीयकरण करने की जरूरत है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह प्रभावी ढंग से चल रहा है और उसकी निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि देशभर के सभी सांसदों को महिला आश्रय गृह और बाल गृहों की जिलावार सूची से संबंधित पत्र भेज दिए हैं। साथ ही उनसे कहा गया है कि वो समय-समय पर ऐसे आश्रय गृहों का दौरा कर जांच करते रहें और महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा की जानकारी लेते रहें।

बता दें कि ऐसे बाल गृहों को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वित्त पोषण प्रदान किया जाता है और इसे राज्य द्वारा स्वयं या गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के माध्यम से चलाया जाता है। मुजफ्फरपुर बालिका गृह की बात करें तो उसका लाइसेंस पिछले साल ही खत्म हो गया था, लेकिन इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर उसे चलाया जा रहा था।

 

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