Neha Kakkar Reveald Her Emotional Connection with Indian Idol

दि राइजिंग न्यूज़

पटना।

 

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह आज बिहार दौरे पर हैं। इस दौरान वे जेडीयू अध्यक्ष व सीएम नीतीश कुमार के साथ सुबह के नाश्ते से लेकर डिनर तक करेंगे। माना जा रहा है कि इस दो मील डिप्लोमेसी के जरिए शाह नीतीश कुमार को साधने की कोशिश करेंगे। इतना ही नहीं दोनों दलों के बीच रिश्तों की कड़वाहट दूर करने और 2019 में सीट बंटवारे जैसे पांच अहम मुद्दों का हल तलाशने की कोशिश करेंगे, अब देखना है कि शाह इस मिशन में कहां तक कामयाब होते हैं?

 

बीजेपी का हिंदुत्व कार्ड

बीजेपी बिहार में हिंदुत्व कार्ड के जरिए कमल खिलाने की जुगत में है। केंद्रीय मंत्री गिरीराज सिंह से लेकर अश्विनी चौबे तक खुलेआम हिंदुत्व की बिसात बिछाने में जुटे हैं। ये बात सीएम नीतीश कुमार को हजम नहीं हो रही है। यही वजह है कि नीतीश ने जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में साफ कहा है कि चाहे कुछ भी हो जाए पार्टी सांप्रदायिकता के मुद्दे पर कभी किसी तरह से समझौता नहीं करने वाली है। ऐसे में शाह के लिए नीतीश को हिंदुत्व के मुद्दे पर साधकर रखना बड़ी चुनौती होगी।

बिहार में बड़ा भाई कौन?

बिहार में जेडीयू और बीजेपी के बीच बड़ा भाई बनने की रस्साकशी जारी है। जेडीयू जहां नीतीश कुमार को राज्य में एनडीए का चेहरा बनाना चाहती है, तो वहीं बीजेपी पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनावी मैदान में उतरना चाहती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के सहारे ही बीजेपी 22 सीटें जीतने में सफल रही है। जबकि नीतीश पहले की तरह बिहार में अपना वर्चस्व चाहते हैं, लेकिन बीजेपी इस पर राजी होती नहीं दिख रही है।

 

लोकसभा सीटों पर तालमेल

बिहार में लोकसभा सीट बंटवारे को लेकर अभी तक कोई फॉर्मूला नहीं बन पाया है। बीजेपी सीटों का बंटवारा 2014 लोकसभा चुनाव के अनुसार चाहती है, राज्य की 40 सीटों में से बीजेपी 22 जीती थी। लोजपा को 6 और रालोसपा को 3 सीटें मिली थीं। जबकि जेडीयू को 2 सीटें। इसके बावजूद नीतीश कुमार 2009 की तरह 25 सीटों की डिमांड रखी। बीजेपी-जेडीयू किसी भी सूरत में एक दूसरे कम सीटों पर नहीं लड़ना चाहते हैं। ऐसे में नीतीश ने 17-17 का फॉर्मूला रखा है, लेकिन बिहार में जेडीयू के सिवा भी एनडीए के दो अन्य दल और हैं। ऐसे में सभी दलों को साधना शाह के लिए बड़ी चुनौती है।

स्पेशल स्टेट्स या विशेष पैकेज

नीतीश कुमार पिछले कुछ महीने से बिहार को स्पेशल स्टेट्स और विशेष पैकेज की मांग उठा रहे हैं। हालांकि 2015 के विधानसभा चुनाव से पहले ही वे इन मांगों को उठाते रहे हैं। नीतीश की दोनों मांगे पूरी करना मोदी के लिए आसान नहीं है, क्योंकि किसी एक राज्य को देने पर दूसरे राज्य भी आवाज उठा सकते हैं। यही वजह रही कि इन्हीं मांगों को लेकर आंध्र प्रदेश में टीडीपी बीजेपी से नाता तोड़कर अलग हो चुकी है। ऐसे में शाह के लिए नीतीश की इन मांगों को पूरा करना टेढ़ी खीर है।

 

बिहार प्लस पर कैसे बनेगी बात?

2019 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू बिहार ही नहीं बल्कि अन्य कई राज्यों में भी चुनाव लड़ना चाहती है। इसीलिए जेडीयू बिहार प्लस का फॉर्मूला बीजेपी के सामने रख रही है। बिहार प्लस विचार के तहत जेडीयू बिहार में सीटों की एक सम्मानजनक संख्या के साथ-साथ झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में कुछ सीटें मांग रही है। बीजेपी के लिए बिहार से अलग जेडीयू को सीटें देना आसान नहीं होगा।

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