Sapna Chaudhary Joins Congress

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

सीबीआई के पूर्व चीफ आलोक वर्मा ने पद से हटाए जाने के एक दिन बाद अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि झूठे, अप्रमाणिक और बेहद कमजोर आरोपों को आधार बनाकर मेरा ट्रांसफर किया गया। ये आरोप एक ऐसे शख्स ने लगाए हैं, जो मुझसे द्वेष रखता है। 1979 की बैच के आईपीएस अफसर वर्मा को गुरुवार देर रात सीबीआई निदेशक पद से हटा दिया गया था। अब उन्हें सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेस और होमगार्ड विभाग का महानिदेशक बनाया गया है।

वर्मा-अस्थाना में हुआ था विवाद

दरअसल, वर्मा और जांच एजेंसी में नंबर-2 अफसर राकेश अस्थाना के बीच विवाद के बाद केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था। फैसले के खिलाफ वर्मा की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 76 दिन बाद बहाल किया था। साथ ही कहा कि उच्चाधिकार चयन समिति ही वर्मा पर लगे आरोपों के बारे में फैसला करेगी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार चयन समिति ने आलोक वर्मा को हटा दिया। समिति ने 2:1 से यह निर्णय लिया।

आलोक वर्मा ने बताया कि उच्च सार्वजनिक संस्थानों में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सीबीआई एक प्रमुख जांच एजेंसी है। यह ऐसी संस्था है जिसकी स्वतंत्रता को सुरक्षित किया जाना चाहिए। सीबीआई को बाहरी शक्तियों के प्रभाव में आए बिना कार्य करना चाहिए। मैंने संस्था की अखंडता को बनाए रखने की कोशिश की, जबकि इसे बर्बाद करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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