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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

18 से कम उम्र के बच्चों को हॉरमोन के इंजेक्शन लगाना या रसायनिक पदार्थ देना, जल्द ही पॉक्सो के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल होगा। बता दें कि इन इंजेक्शन और पदार्थ के जरिए बच्चों में सेक्शुअल परिपक्वता लाई जाती है और फिर उन्हें जबरन यौन गतिविधियों के लिए तैयार किया जाता है। अब इसे पॉक्सो की धारा 9 के तहत अपराध माना जाएगा। यह संशोधन उनमें से एक है जिसका प्रस्ताव केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किया है।

मंत्रालय उन लोगों के खिलाफ भी सख्त कानून लाना चाहती है जो बच्चों से जुड़े पोर्नोग्राफिक चीजों को रखते हैं। सोशल मीडिया और वाट्सऐप पर इससे संबंधित सामग्री को फारवर्ड करना अब दंडनीय होगा। इस तरह का अपराध करने वालों को कम से कम पांच साल की जेल होगी। वहीं जुर्माने के साथ अधिकतम सजा सात साल होगी। पॉक्सो अधिनियम में किए जाने वाले संशोधन को कानून मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है और जल्द ही इसे बाल विकास मंत्री मेनका गांधी से भी मंजूरी मिल जाएगी। फाइनल प्रस्ताव कैबिनेट के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

 

प्रस्ताव में आपराधिक कानून (संशोधित) 2018 का विस्तार करने के लिए पॉक्सो में संशोधन किया जाएगा। जिसके तहत 12 साल या उससे नीचे के किशोर या किशोरी के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को फांसी की सजा दी जाएगी। पॉक्सो कानून में बदलाव की मांग जम्मू और कश्मीर के कठुआ में नाबालिग बच्ची के दुष्कर्म के बाद हुई हत्या और उत्तर प्रदेश के उन्नाव में महिला के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद उठी। संशोधन को अगस्त में संसद भवन में पेश किया गया जिसे की मंजूरी मिल गई। अब संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि वह पॉक्सो अधिनियम के संशोधन को दोनों सदनों से पास करवा लेगी।

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