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सिर्फ दलित नहीं...यूपी के दलित कहिए

Home | Last Updated : Jun 20, 2017 11:50 AM IST


This is why modi choose this man for president candidate


दि राइजिंग न्‍यूज

लखनऊ।

जब जब राष्‍ट्रपति चुनाव के उम्‍मीदवार की बात हुई केंद्र मंत्री थावरचंद गहलोत का भी नाम लिया गया। मध्‍य प्रदेश से भाजपा के सांसद गहलोत को मोदी की पहली पसंद माना जाता था। कहा जाता था कि यदि दलित चुनना हुआ तो वह थावरचंद गहलोत को तरजीह देंगे। लेकिन कहते हैं न, कि जहां पर लोग सोचना बंद करते हैं, वहां से मोदी की सोच शुरू होती है।

अचानक ऐसा क्‍या हुआ कि मध्य प्रदेश के इस दलित की जगह मोदी ने कानपुर के एक अन्य दलित चेहरे को अपनी पसंद बना लिया।

बहुत कारण हैं कि क्‍यों भाजपा ने कोविंद के नाम पर मोहर लगाई। इनमें सबसे बड़ी वजह है कि वे यूपी के दलित हैं।

कोविंद उत्तर प्रदेश से आते हैं और मोदी के लिए राजनीतिक रूप से मध्य प्रदेश के दलित की जगह उत्तर प्रदेश के दलित को चुनना हर लिहाज से फायदेमंद है।

अन्‍य कारणों पर नजर डालिए


जिम्‍मेदारियां

रामनाथ कोविंद स्वयंसेवक हैं। भाजपा के पुराने नेता हैं। संघ और भाजपा में कई प्रमुख पदों पर रहे हैं। एससीएसटी प्रकोष्ठ के प्रमुख का दायित्व भी निभाया है और संगठन की मुख्यधारा की ज़िम्मेदारियां भी।


जाति

वो कोरी समाज से आने वाले दलित हैं। यानी उत्तर प्रदेश में दलितों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी। पहली जाटव और दूसरी पासी है।


कम बोलना और ज्‍यादा सुनना

कोविंद पढ़े-लिखे हैं। भाषाओं का ज्ञान है। दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता के तौर पर उनका एक अच्छा खासा अनुभव है। सरकारी वकील भी रहे हैं। राष्ट्रपति पद के लिए जिस तरह की मूलभूत आवश्यकताएं समझी जाती हैं, वो उनमें हैं, और मृदुभाषी हैं। कम बोलना और शांति के साथ काम करना कोविंद की शैली है। अगर योगी को छोड़ दें तो मोदी ऐसे लोगों को ज़्यादा पसंद करते आए हैं जो बोलें कम और सुनें ज़्यादा। शांत लोग मोदी को पसंद आते हैं क्योंकि वो समानांतर स्वरों को तरजीह देने में यकीन नहीं रखते। संघ भी इस नाम से खुश है क्योंकि कोविंद की जड़ें संघ में निहित हैं।


नीतीश संग तालमेल


लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि कोविंद के साथ नीतीश का तालमेल भी अच्छा है। उत्तर प्रदेश से होना और बिहार का राज्यपाल होना दोनों राज्यों में सीधे एक संदेश भेजता है। यह संदेश मध्यप्रदेश से जाता तो शायद इतना प्रभावी न होता।


उत्‍तर प्रदेश में अपार संभावनाएं


मोदी राजनीति में जिन जगहों पर अपने लिए अधिक संभावना देख रहे हैं उनमें मध्यप्रदेश से कहीं आगे उत्तर प्रदेश का नाम है। बिहार मोदी के लिए एक अभेद्य दुर्ग है और वहां भी एक मज़बूत संदेश भेजने में मोदी सफल रहे।


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