Ali Asgar Faced Molestation in The Getup of Dadi

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली। 

 

दुबई से मुंबई लाया गया साल 1993 के आरोपी फारूख टकला के पासपोर्ट का नूतनीकरण महज एक दिन में हो गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फारूख टकला की पहुंच सत्ता के गलियारे तक थी।

 

मुंबई बम धमाके में 100 से अधिक लोगों को सजा दिलवाने वाले बरिष्ठ वकील उज्वल निकम यह खुलासा किया है कि टकला के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी होने के 15 साल के बाद महज एक दिन में उसके पासपोर्ट का नूतनीकरण हो गया था। हालांकि एड. निकम इसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखते। उनका कहना है कि यह ऐसा मामला है जिससे 1993 के मुंबई बम धमाका मामले में पाकिस्तान का नकाब उतर सकता है।

कुख्यात भगोड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के काले कारोबार का मैनेजर मुश्ताक मोहम्मद फारूख उर्फ फारूख टकला के खिलाफ 1995 में रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद उसका पासपोर्ट रद्द किया गया या नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं हो पया है लेकिन, रेडकार्नर नोटिस जारी होने के 15 साल बाद 7 फरवरी 2011 को टकला ने भारत में पासपोर्ट नूतनीकरण के लिए आवेदन किया और दूसरे दिन ही उसके पासपोर्ट का नूतनीकरण हो गया।

 

वरिष्ठ वकील उज्वल निकम ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है। कल भगोड़ा दाऊद इब्राहिम के पासपोर्ट का भी नूतनीकरण हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह देश की सुरक्षा का मुद्दा है। इसलिए इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए। फारूख टकला के पासपोर्ट के नूतनीकरण की जांच होनी चाहिए और इसके गुनहगार को कोर्ट में लाया जाना चाहिए।

एड. उज्वव निकम ने बताया कि मैने अपने पासपोर्ट के नूतनीकरण के लिए जब आवेदन किया तो उसकी कानूनी प्रक्त्रिस्या पुलिस जांच आदि में छह महीने लग गए। उसके बाद मुझे पासपोर्ट मिला। ऐसे में एक भगोड़ा आरोपी जिसके खिलाफ रेडकार्नर नोटिस जारी हुआ हो। उसका पासपोर्ट का नूतनीकरण आवेदन के दूसरे दिन कैसे हो सकता है। यह जांच का विषय है। इसमें कहीं तो कमीं तो नहीं रह गई थी या प्रोसीजर पूरी तरह फॉलो नहीं किया गया।

 

इस तरह बेनकाब होगा पाकिस्तान  

दाऊद इब्राहिम गैंग में फारूख टकला का काम लॉजिस्टिक सपोर्ट का था। मुंबई से वाया दुबई जिसे पाकिस्तान में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता था। उसके रहने-खाने आदि की व्यवस्था टकला ही देखता था। एड. निकम ने %अमर उजाला% से बातचीत में कहा कि फारूख के मुंबई से दुबई जाने और दुबई से मुंबई आने से लेकर फिर दुबई जाने का ठप्पा उसके पासपोर्ट पर है। लेकिन, वहां से वह कहां गया। इसका कोई ठप्पा उसके पासपोर्ट पर नहीं है। तो क्या वह हवा में उड़ रहा था।

उन्होंने बताया कि 1993 मुंबई बम धमाका मामले में जिन दो आरोपियों को हमने माफी गवाह बनाया था उन्होंने विशेष टाडा कोर्ट को बताया था कि जब वे पाकिस्तान गए थे तब वहां के एयरपोर्ट पर हमारा इमिग्रेशन चेक नहीं किया गया। शायद फारूख टकला को यह पता होगा कि क्यों चेकिंग नहीं हुई। तो क्या इसका मतलब यह है कि फारूख जिस देश में रहता था उसकी पहचान छुपाई गई। यह बात फारूख टकला को पता है। टकला के इस खुलासे से मुंबई बम बिस्फोट मामले में पाकिस्तान का नकाब उतरने की संभावना है। 

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