Actor Arshad Warsi on Total Dhamaal

दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (एलजी) के बीच अधिकारों की लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया। दो जजों की बेंच ने कहा कि दिल्ली सरकार के पास सर्विसेज पर कार्यकारी शक्ति नहीं है। हालांकि, ट्रांसफर और नियुक्ति के अधिकारों पर दोनों जजों (एके सीकरी और अशोक भूषण) में मतभेद थे, ऐसे में यह मामला अब तीन जजों की बेंच के पास भेज दिया गया।

क्या हुआ सुप्रीम कोर्ट में

  • ग्रेड-1 और ग्रेड-2 (सचिव स्तर) के अफसरों के ट्रांसफर केंद्र सरकार करेगी, ग्रेड-3 और 4 दिल्ली सरकार के पास रहेगा। हालांकि, जस्टिस अशोक भूषण इस फैसले से असहमत थे।

  • एंटी करप्शन ब्यूरो केंद्र सरकार के पास रहेगा।

  • सरकारी वकील की नियुक्ति दिल्ली सरकार के पास रहेगी।

  • कमीशन ऑफ इंक्वायरी केंद्र सरकार के अंतर्गत रहेगी।

  • दिल्ली में जो जमीन है उसका सर्किल रेट दिल्ली सरकार तय करेगी। इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड दिल्ली सरकार के पास रहेगा।

  • जब उप-राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच विवाद होगा तो उप-राज्यपाल की राय मानी जाएगी।

 

क्या था मामला

जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की बेंच ने विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन्स को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पिछले साल 1 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। 2014 में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद से केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच प्रशासनिक अधिकारों के लिए खींचतान जारी है।

 

एलजी के पास प्रशासनिक अधिकार: केंद्र

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि दिल्ली में सर्विसेज को संचालित करने का अधिकार एलजी के पास है। साथ ही यह भी कहा था कि शक्तियों को दिल्ली के प्रशासक (एलजी) को सौंप दिया जाता है और सेवाओं को उसके माध्यम से प्रशासित किया जा सकता है। केंद्र ने यह भी कहा था कि जब तक भारत के राष्ट्रपति स्पष्ट रूप से निर्देश नहीं देते, तब तक एलजी मुख्यमंत्री या मंत्रिपरिषद से परामर्श नहीं कर सकते।

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