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दि राइजिंग न्यूज़

नई दिल्ली।

 

संविधान के 124वें संशोधन के लिए राज्यसभा में जोरदार बहस के बाद बिल पास हो गया है। इस संशोधन के बाद सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा। बुधवार को ही इसे राज्यसभा की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद यह विधेयक राष्ट्रपति के पास सीधे मंजूरी के लिए जाएगा। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद राज्य इसके आधार पर आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को शैक्षणिक संस्थानों और नौकरियों में 10 प्रतिशत तक आरक्षण दे सकेंगे।

 

राष्ट्रपति को भेजा जाएगा बिल

विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही संविधान संशोधन हो जाएगा। संशोधन मूल अधिकारों से जुड़े अनुच्छेद 15 व 16 में है, इसलिए अनुच्छेद 368 (2) के तहत इसे राज्यों को अनुमोदन के लिए भेजने की जरूरत नहीं है।

क्या तुरंत मिलेगा आरक्षण

संविधान संशोधन आरक्षण के लिए आधार है। अब सरकार के पास दो रास्ते हैं। एक कानून बनाकर जो कि इसमें काफी समय लगेगा। दूसरा शासकीय आदेश से तुरंत लागू हो सकता है।

 

कोर्ट में दी जा सकेगी चुनौती

हां, क्योंकि इसे 9वीं अनुसूची में नहीं रखा। जानकारों के मुताबिक संविधान में आरक्षण का आधार सामाजिक व शैक्षणिक पिछड़ापन हो सकता है आर्थिक नहीं।

 

क्या हो सकता है सुप्रीम कोर्ट में

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है तो कोर्ट इस बात का परीक्षण करेगा कि यह संशोधन संविधान के मूल ढांचे के इतर तो नहीं। ऐसा होगा तो इसे निरस्त किया जा सकता है। अब तक आर्थिक आधार पर आरक्षण के जो मामले कोर्ट पहुंचे उसे इसी आधार पर निरस्त किया गया कि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं था। अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर आर्थिक हालात को आरक्षण का आधार बनाने से सुप्रीम कोर्ट के परीक्षण का आधार बदल जाएगा।

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