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दि राइजिंग न्‍यूज

खेल डेस्‍क।

 

लगातार बढ़ रहे डोपिंग के मामलों के मद्देनज़र सख्‍त रुख अपनाया जा रहा है। देश में डोपिंग को कानूनी जामा पहनाने के लिए नेशनल एंटी डोपिंग बिल, 2018 की रूप रेखा तैयार कर ली गई है। जस्टिस मुकुल मुद्गल की अगुवाई में 15 सदस्यीय कमेटी ने बिल का ड्रॉफ्ट तैयार कर खेल मंत्रालय को सौंप दिया है।

बिल में शक्तिवर्धक दवाओं की तस्करी और डोपिंग पर संगठित अपराध पर एक से चार साल तक की कैद और अधिकतम 10 लाख रुपये के जुर्माने की सिफारिश की गई है। कमेटी ने यह भी सिफारिश की है डोपिंग से जुड़े मामलों की जांच सीबीआइ को सौंपी जाएगी। सीबीआइ की रिपोर्ट के आधार पर नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) प्रथम श्रेणी के न्यायिक मैजिस्ट्रेट, मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट तक की अदालत में केस लेकर जा सकते हैं।

बिल के पास होने पर देश में पहली बार नेशनल एंटी डोपिंग एक्ट ऑफ इंडिया, 2018 लागू हो जाएगा। यह एक्ट सभी खेल संघों और खिलाड़ियों पर लागू होगा।

शक्तिवर्धक दवाओं की तस्करी होगा अपराध

बिल में सिफारिश की गई है कि एथलीटों को नियमित रूप से शक्तिवर्धक दवाएं सप्लाई करने वाले को तस्करी माना जाएगा। ऐसे व्यक्ति को अधिकतम एक साल की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यही नहीं शक्तिवर्धक दवाओं का संगठित अपराध चलाने वाले को अधिकतम चार साल की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही कोई भी व्यक्ति एंटी डोपिंग नियमों का पालन नहीं करता है तो उस पर 20 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।

दूसरी बार इन नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माने की राशि दो लाख तक की जा सकती है। एक्ट लागू होने पर बाजार में खुलेआम प्रतिबंधित सप्लीमेंटों की बिक्री पर रोक लग जाएगी। साथ ही मनमाने तौर पर इसे सप्लाई करने वालों पर भी लगाम लगेगी।

सीबीआइ को मिलेगी जांच की शक्तियां

बिल में सिफारिश की गई है कि संगठित अपराध का मामला सामने आने पर नाडा इसकी शिकायत सीबीआइ को कर सकता है। सीबीआइ की जांच में मदद नाडा करेगा। एंटी डोपिंग नियमों को कड़ाई से लागू करने के लिए तीन सदस्यीय एथिक्स कमीशन बनाने को कहा गया है। खिलाड़ियों के डोप में फंसने पर एंटी डोपिंग पैनल के समक्ष होने वाली सुनवाई को न्यायिक प्रक्रिया माना जाएगा। 

सभी खेल संघ, खिलाड़ी आएंगे दायरे में

यह एक्ट सभी खेल संघों, खिलाड़ियों, सपोर्ट स्टाफ पर लागू होगा। बिल में किसी खेल संघ का नाम नहीं लिया गया है। ऐसे में बीसीसीआइ को भी इसमें शामिल होना पड़ेगा। हालांकि बीसीसीआइ अदालत में दलील दे चुका है कि वह अपने को खेल संघ नहीं मानते हैं। इस बिल को विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर कमेटी ने छह बैठकों के बाद तैयार किया है। मंत्रालय जल्द ही इसे जनता के सामने रखकर आपत्तियां दर्ज करेगा। इसके बाद ही मुख्य बिल को संसद में रखकर कानूनी जामा पहनाया जा सकेगा।

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