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दि राइजिंग न्यूज़

खेल डेस्क।

क्रिकेट में विकेटकीपर का काम शायद सबसे कठिन होता है। विकेटकीपर को बेहद एकाग्रता से पूरे खेल पर नजर रखनी होती है। टीम में विकेटकीपर की पोजिशन की सबसे ज्यादा मांग होती, लेकिन विकेटकीपर होने के लिए फिटनेस, कंसन्ट्रेशन और फुर्ती की जरूरत होती है। यूं तो भारत इस मामले में हमेशा से ही भाग्यशाली रहा है कि उसके पास हर फील्ड में अच्छे खिलाड़ी रहे हैं, विकेटकीपर भी इसका अपवाद नहीं है। टीम में कई शानदार विकेटकीपर रहे हैं। फिलवक्त टीम इंडिया की वनडे और टी-20 टीम में विकेटकीपिंग की कमान महेंद्र सिंह धोनी के हाथों में सुरक्षित है।

महेंद्र सिंह धोनी की स्टंपिंग के सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैन्स हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में जब स्टंपिंग या विकेटकीपर्स के नाम लिए जाते हैं, तो उनमें महेंद्र सिंह धोनी का नाम जरूर शुमार होता है। आज के दौर की बात करें तो माही के आस-पास भी कोई विकेटकीपर शायद नहीं ठहरता है। आज के दौर में वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वह बेस्ट विकेटकीपर हैं।

जब धोनी विकेटों के पीछे होते हैं तो बल्लेबाजों को भी खास ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि वह जानते हैं कि धोनी के ग्लव्स में गेंद समाने का मतलब है उनका पवेलियन लौटना। बल्लेबाज को अपने फुटवर्क और शॉट्स का खास ख्याल रखना पड़ता है, क्योंकि बल्लेबाज की छोटी-सी गलती और पलक झपकते ही धोनी गिल्लियों को उड़ा देते हैं।

महेंद्र सिंह धोनी की असाधारण कीपिंग और स्टंपिंग का यह आलम है कि जब भी वह विश्वास के साथ अपील करते हैं तो यह तय होता है कि बल्लेबाज निश्चित ही आउट है। आपको दूसरी बार इसे देखने की जरुरत ही नहीं होती है। टीम इंडिया के सबसे इस पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नाम अब तक 771 शिकार दर्ज हैं। धोनी ने 316 वनडे मैचों में 295 कैच लपकने के साथ रिकॉर्ड 106 स्टंपिंग भी की हैं। इस लिस्ट में वह तीसरे नंबर पर हैं। इस लिस्ट में पहले नंबर पर मार्क बाउचर (998) और दूसरे नंबर एडम गिलक्रिस्ट (905) हैं।

धोनी की विकेटकीपिंग पर होनी चाहिए रिसर्च

टीम इंडिया के फील्डिंग कोच आर श्रीधर का मानना है कि महेन्द्र सिंह धोनी की विकेटकीपिंग शैली कभी भी विशुद्ध रूप से पारंपरिक नहीं रही है, लेकिन इसने उनके पक्ष में काम किया है। धोनी कीपिंग अभ्यास सत्र में ज्यादा भाग नहीं लेते, लेकिन करीबी स्टंपिंग और रनआउट करने में उन्हें महारथ हासिल है। श्रीधर ने कहा, “धोनी की अपनी शैली है, जो उनके लिए काफी सफल हैं। मुझे लगता है हम उनकी विकेटकीपिंग शैली पर शोध कर सकते हैं और मैं इसे “द माही वे” नाम देना चाहूंगा। उनकी शैली से कई चीजें सीखी जा सकती हैं, इतनी सारी चीजें जिसके बारे में युवा विकेटकीपर सोच भी नहीं सकते। वह अपने तरीके के अनूठे खिलाड़ी हैं जैसा क्रिकेटरों को होना चाहिए।” कोच श्रीधर ने कहा, “उनके हाथ कमाल के हैं। स्पिनरों के लिए वह सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर हैं। स्टंपिंग के लिए उनके हाथ बिजली से भी तेज चलते हैं। यह उनकी नैसर्गिक कला है जिसे देखना अद्भुत है।”

 

 

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