Irrfan Khan Writes an Emotional Letter About His Health

दि राइजिंग न्‍यूज

 

अक्स‍र लोग अपनी अच्छी और बुरी स्थिति के ‌लिए वक्त को‌ जिम्मेदार ठहराते हैं, जबकि वक्त अच्छा-बुरा नहीं होता, बल्कि आदमी की कोशिशें और उसकी मन की स्थिति अच्छी व बुरी होती हैं। इन सबके बावजूद भी कभी-कभार कुछ चीजें व्यक्ति की कोशिशों को प्रभावित करती हैं।

 

 

कभी-कभी आसमान में स्थित सितारे और उनकी स्थितियां भी आदमी की कोशिशों और उनके नतीजों को प्रभावित करती हैं। जैसे पंचांग में अक्सर लिखा होता है कि कभी रात में तो कभी दिन में भद्रा रहेगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भद्रा सबके लिए खराब है या सबके लिए अच्छी।

1400 तिथियों और ढाई हजार लोगों के कामकाज पर किए गए एक विश्लेषण के अनुसार भद्रा किसी के लिए अच्छी होती है, तो किसी के लिए बुरी।

 

 

पौराणिक दृष्टि से भद्रा सूर्य की पत्नी छाया से जन्मी है और शनि की बहन है। इनकी पुण्य कार्य में विघ्न बाधा और दुष्कर्मों में धकेलने की खासी रुचि रही है। जन्म के बाद, विवाह के समय भद्रा के उपद्रवों को देखकर ब्रह्मा ने कुछ खास मुहूर्त तय किए और छूट दी कि इन मौकों पर तुम विघ्न बाधा पैदा करो, जो तुम्हारी सेवा और आदर करे, उन्हें बख्श दो।

 

 

इस खास स्थिति को विष्टी भी कहते हैं। शास्त्रीय मर्यादा है कि जो लोग पुण्य कर्म करते हैं, अच्छे स्वभाव के हैं और दूसरों की भलाई में रत रहते हैं, उन्हें यह पीड़ित नहीं करतीं। हमारे ऋषि मुनियों ने अपने स्वभाव में बदलाव लाकर बुरे वक्त को अच्छे में बदलने का उपाय निकाला है।

 

 

भद्रा में कोई भी शुरुआत करने की मनाही है पर जातक भास्कर के अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान देकर उनकी सेवा कर मुहूर्त को उल्‍टा जा सकता है यानी बुरे मुहूर्त को सही किया जा सकता है।

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