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महावीर जयंती जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है। भगवान महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व चैत्र शुक्ल त्रयोदशी वैशाली गणराज्य के कुंडलपुर ग्राम में हुआ था।

भगवान महावीर 30 वर्ष की आयु में सांसारिक मोहमाया को त्याग कर सन्यास धारण किया था। भगवान महावीर को 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद कैवल्य अर्थात् ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

भगवान महावीर की माता का नाम त्रिशला और पिता का नाम सिद्धार्थ था। जैन धर्म त्रिशला के 16 स्वप्न का अत्यधिक महत्व माना जाता है। भगवान महावीर के जन्म से पहले एक बार महारानी त्रिशला अपने नगर में हो रही अद्भुत रत्नवर्षा के बारे में सोच रही थी।

महारानी त्रिशला सोचते-सोचते गहरी निद्रा में सो गई। महारानी त्रिशला उसी रात की अंतिम प्रहर में 16 शुभ स्वप्न देखे। सुबह जगने पर महारानी ने महाराज सिद्धार्थ से 16 स्वप्न के बारे में उनसे चर्चा की।

महारानी त्रिशला ने महाराजा सिद्धार्थ से इस स्वप्न का फल जानने की इच्छा प्रकट की। राजा सिद्धार्थ एक कुशल राजनीतिज्ञ के साथ-साथ ज्योतिष शास्त्र के भी ज्ञाता थे।

उन्होंने रानी त्रिशला से कहा कि वह एक-एक कर अपना स्वप्न के बारे में बताएं, जिसका फल वे एक-एक कर बताएंगे। फिर महारानी त्रिशला एक-एक कर सारे स्वप्न राजा सिद्धार्थ को सुनाए। 

ये थे महारानी त्रिशला के 16 स्वप्न 

  • रानी ने पहला स्वप्न बताया: स्वप्न में एक अति विशाल श्वेत हाथी दिखाई दिया।

  • फल- उनके घर एक अद्भुत पुत्र-रत्न उत्पन्न होगा।

  • दूसरा स्वप्न: श्वेत वृषभ।

  • फल: वह पुत्र जगत का कल्याण करने वाला होगा।

  • तीसरा स्वप्न: श्वेत वर्ण और लाल अयालों वाला सिंह।

  • फल: वह पुत्र सिंह के समान बलशाली होगा।

  • चौथा स्वप्न: कमलासन लक्ष्मी का अभिषेक करते हुए दो हाथी।

  • फल: देवलोक से देवगण आकर उस पुत्र का अभिषेक करेंगे।

  • पांचवां स्वप्न: दो सुगंधित पुष्पमालाएं।

  • फल: वह धर्म तीर्थ स्थापित करेगा और जन-जन द्वारा पूजित होगा। 

  • छठा स्वप्न: पूर्ण चंद्रमा।

  • फल: उसके जन्म से तीनों लोक आनंदित होंगे।

  • सातवां स्वप्न: उदय होता सूर्य।

  • फल: वह पुत्र सूर्य के समान तेजयुक्त और पापी प्राणियों का उद्धार करने वाला होगा।

  • आठवां स्वप्न: कमल पत्रों से ढंके हुए दो स्वर्ण कलश।

  • फल: वह पुत्र अनेक निधियों का स्वामी निधि‍पति होगा।

  • नौवां स्वप्न: कमल सरोवर में क्रीड़ा करती दो मछलियां।

  • फल: वह पुत्र महाआनंद का दाता, दुखहर्ता होगा।

  • दसवां स्वप्न: कमलों से भरा जलाशय।

  • फल: एक हजार आठ शुभ लक्षणों से युक्त पुत्र प्राप्त होगा।

  • ग्यारहवां स्वप्न: लहरें उछालता समुद्र।

  • फल: भूत-भविष्य-वर्तमान का ज्ञाता केवली पुत्र।

  • बारहवां स्वप्न: हीरे-मोती और रत्नजडि़त स्वर्ण सिंहासन।

  • फल: आपका पुत्र राज्य का स्वामी और प्रजा का हितचिंतक रहेगा।

  • तेरहवां स्वप्न: स्वर्ग का विमान।

  • फल: इस जन्म से पूर्व वह पुत्र स्वर्ग में देवता होगा।

  • चौदहवां स्वप्न: पृथ्वी को भेद कर निकलता नागों के राजा नागेन्द्र का विमान।

  • फल: वह पुत्र जन्म से ही त्रिकालदर्शी होगा।

  • पन्द्रहवां स्वप्न: रत्नों का ढेर।

  • फल: वह पुत्र अनंत गुणों से संपन्न होगा।

  • सोलहवां स्वप्न: धुआंरहित अग्नि।

  • फल: वह पुत्र सांसारिक कर्मों का अंत करके मोक्ष (निर्वाण) को प्राप्त होगा।

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