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बुधवार (18 अप्रैल) को अक्षय तृतीया का पावन पर्व मनाया जा रहा है। भारतीय कालगणना के मतानुसार चार स्वयंसिद्ध अभिजीत मुहूर्त हैं- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अर्थात गुडीपाडवा, आखातीज अथवा अक्षय तृतीया, दशहरा एवं दीपावली के पूर्व की प्रदोष तिथि। इस बार अक्षय तृतीया को कृतिका नक्षत्र एवं सर्वार्थ सिद्धि योग में रहेगी जो बहुत ही दुर्लभ व शुभ संयोग है।

तृतीया तिथि में यदि सोमवार या बुधवार के साथ रोहिणी नक्षत्र भी पड़ जाए तो बहुत श्रेष्ठ माना जाता है। इस बार अक्षय तृतीया बुधवार को ही है। इस दिन सम्पन्न की गईं साधनाएं व दान अक्षय रहकर शीघ्र फलदायी होते हैं।

यह अक्षय तृतीया तिथि ईश्वर तिथि है। यह अक्षय तिथि परशुराम जी का जन्मदिन होने के कारण परशुराम तिथि भी कही जाती है। परशुराम जी की गिनती महात्माओं में की जाती है। अतः यह तिथि चिरंजीवी तिथि भी कहलाती है। चारों युगों सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग में से त्रेता युग का आरंभ इसी आखातीज से हुआ है। त्रेतायुग का आरंभ अक्षय तृतीया  को हुआ है, जिससे इस तिथि को युग की आरंभ की तिथि “युगादितिथि” भी कहते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

अक्षय तृतीया पूजा का शुभ मुहूर्त 05:53:12 से 12:20:50 तक है। अवधि: छह घंटे 27 मिनट।

शास्त्र में उल्लेखित है कि अक्षय तृतीया के दिन स्वर्ण की खरीदारी भी करनी चाहिए। धन योग बनता है। धन-संपदा में वृद्धि का योग भी बनता है। आज के दिन जो भी कार्य मनुष्य करता है, वह अक्षय हो जाता है। इसलिए धार्मिक एवं शुभ कार्य आज के दिन जरूर करना चाहिए।

खरीददारी का शुभ मुहूर्त

खरीददारी करने का शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 56 से आधी रात तक रहेगा।

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