Actress katrina Kaif and Mouni Roy Visited Durga Puja Pandal

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29 अक्टूबर से पंचक शुरू हो गया है। दोपहर 2 बजकर 34 मिनट से पंचक लग गया, जो 2 नवंबर तक रहेगा। जो पंचक रविवार से शुरू होता है उसे रोग पंचक कहते हैं। ज्योतिषशास्त्र में पंचक लगने को अशुभ माना जाता है। पंचक की गणना चन्द्रमा की स्थिति पर निर्भर होती है। इस दौरान कुछ कामों को करने की मनाही होती है जिसे हमें भूल कर भी नहीं करना चाहिए।

 

 

पंचक पांच दिनों तक होता है जो वर्ष में कई बार आता है। ज्योतिष के अनुसार पंचक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं। अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो उसे रोग पंचक कहा जाता है। वहीं सोमवार से शुरू हुआ पंचक राज पंचक कहलाता है।

जो पंचक मंगलवार को शुरू हो उसे अग्नि पंचक कहते हैं इस दौरान आग लगने का भय रहता है। इस दौरान औजारों की खरीदारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा मृत्यु पंचक और चोर पंचक होता है। मृत्यु पंचक शनिवार और चोर पंचक शुक्रवार को होता है। दोनों काफी घातक और अशुभ पंचक माने जाते हैं।

 

 

पंचक में ये पांच काम नहीं करने चाहिए-

  • पंचक में चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
  • पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है।
  • पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है।
  • पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए।
  • पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए।

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