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नवरात्रि 2018: क्या है कलश स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त और पूजन विधि?

Spiritual | Last Updated : Mar 17, 2018 08:05 AM IST
   
Navratri 2018: Kalash Sthapana and Pooja Vidhi

दि राइजिंग न्‍यूज

 

18 मार्च से नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। इस बार नवरात्रि नौ दिन की ना होकर आठ दिन की हैं। नव‍रात्रि के पहले दिन माता दुर्गा के पहले रूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इसी दिन कलश स्थापना होगी।

 

मां शैलपुत्री

 

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

कलश-स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त- प्रातः सात बजकर 35 मिनट से लेकर तीन बजकर 35 मिनट तक।

वैसे नवरात्र के प्रारंभ से ही अच्छा वक्त शुरू हो जाता है इसलिए अगर जातक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना नहीं कर पाता है तो वो पूरे दिन किसी भी वक्त कलश स्थापित कर सकता है, उसका कोई दुषप्रभाव नहीं पड़ता है। नवरात्रि पूजन से घर में सुख समृद्धि का निवास होता है।

कलश स्थापना व पूजा विधि

हिन्दू शास्त्रों में किसी भी पूजन से पूर्व, गणेशजी की आराधना का प्रावधान बताया गया है। माता की पूजा में कलश से संबन्धित एक मान्यता के अनुसार, कलश को भगवान श्विष्णु का प्रतिरूप माना गया है। इसलिए सबसे पहले कलश का पूजन किया जाता है। कलश स्थापना करने से पहले पूजा स्थान को गंगा जल से शुद्ध किया जाना चाहिए। पूजा में सभी देवताओं आमंत्रित किया जाता है।

कलश में हल्दी को गांठ, सुपारी, दूर्वा, मुद्रा रखी जाती है और पांच प्रकार के पत्तों से कलश को सजाया जाता है। इस कलश के नीचे बालू की वेदी बनाकर कर जौ बौये जाते हैं। जौ बोने की इस विधि के द्वारा अन्नपूर्णा देवी का पूजन किया जाता है, जोकि धन-धान्य देने वाली हैं। मां दुर्गा की प्रतिमा पूजा स्थल के मध्य में स्थापित कर रोली, चावल, सिंदूर, माला, फूल, चुनरी, साड़ी, आभूषण और सुहाग से माता का श्रृंगार करना चाहिए।

साथ ही माता जी को प्रातः काल फल एवं मिष्ठान का भोग और रात्रि में दूध का भोग लगाना चाहिए और पूर्ण वाले दिन हलवा पूरी का भोग लगाना चाहिए। इस दिन से “दुर्गा सप्तशती” अथवा “दुर्गा चालीसा” का पाठ प्रारम्भ किया जाता है। पाठ पूजन के समय अखंड दीप जलाया जाता है, जोकि व्रत के पारण तक जलता रहना चाहिए।

कलश स्थापना के बाद गणेश जी और मां दुर्गा की आरती से नौ दिनों का व्रत प्रारंभ किया जाता है। कलश स्थापना के दिन ही नवरात्रि की पहली देवी मां दुर्गा के शैलपुत्री रूप की आराधना की जाती है। इस दिन सभी भक्त उपवास रखते हैं और सायंकाल में दुर्गा मां का पाठ और विधिपूर्वक पूजा करके अपना व्रत खोलते हैं।


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