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महाशिवरात्रि 2018: भगवान शिव की पूजा में न करें ये गलतियां

Spiritual | Last Updated : Feb 06, 2018 12:37 PM IST

Mahashivaratri 2018: Do not These Mistakes in Lord Shiva Worship


दि राइजिंग न्‍यूज

 

साल 2018 में महाशिवरात्रि का महापर्व दो दिन यानी 13 और 14 फरवरी को पड़ रहा है। देश के कुछ शहरों में 13 को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी तो कुछ शहरों में 14 फरवरी को। ऐसा होने से इस बार वेलेंटाइन डे और महाशिवरात्रि दोनों एक साथ आ रहे हैं।

 

 

धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि का व्रत करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

आज के ही दिन भगवान शिव का मां पार्वती के साथ विवाह हुआ था इसलिए इस पर्व को लोग उत्सव के रूप में मनाते हैं।

 

 

भगवान शिव की पूजा के शुभ मुहूर्त-

शिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष में चतुर्दशी को मनाई जाती है। ज्योतिष के जानकारों की मानें तो इस बार चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी मंगवलार 10:36 से प्रारंभ होगी, जो 15 फरवरी 2018, 12:48 बजे खत्म होगी। ऐसे में 13 और 14 फरवरी को दो दिन तक शिव उपासना का लाभ भक्तों को मिलेगा। व्रत करने लिए 14 तारीख का दिन ही अनुकूल माना जा रहा है।

 

 

भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक करना और बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है, लेकिन ध्यान रखें के कि पूजा में यहां बताई जा रही चार गलतियां भूलकर भी न करें।

 

  • माना जाता है कि भगवान शिव को सफेद फूल बहुत पसंद हैं। इसीलिए पूजा में लोग धतूरे का फूल चढ़ाते हैं, लेकिन केतकी का फूल भूलकर भी नहीं चढ़ाना चाहिए।

  • तुलसी एक ऐसा पौधा है जिसका प्रयोग सभी तरह की पूजा में और सभी देवताओं में चढ़ाया जाता है, लेकिन भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है। खासकर शिवलिंग में तुलसी नहीं चढ़ाई जानी चाहिए। तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है।

  • शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए जल में चावल के कुछ दाने डालना बहुत ही शुभ माना जाता है, लेकिन ध्यान रहे कि टूटे चावल भूलकर भी न चढ़ाएं। मान्यता है जलाभिषेक के साथ टूटे चावल अशुभ फल देने वाले होते हैं।

  • जो चीजें भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय हैं उनमें से बिल्व पत्र या बेलपत्र है, लेकिन ध्यान रखें कि यह तीन पत्तियों या इससे ज्यादा पत्तियों वाला ही चढ़ाएं। खंडित बिल्व पत्र या कीड़े का खाया बिल्वपत्र भूलकर भी न चढ़ाएं।



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