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मां अन्‍नपूर्णा की कृपा से संसार का भरण पोषण हो रहा है और अन्न वस्त्र मिल रहा है। माना जाता है कि दुनिया में समस्त प्राणियों को भोजन मां अन्नपूर्णा की कृपा से ही मिल रहा है। भगवान शिव चूंकि समस्त सृष्टि का नियंत्रण अपने परिवार की तरह करते हैं। अतः उनके इस परिवार की गृहस्थी मां अन्नपूर्णा चलाती हैं।

मां अन्नपूर्णा की उपासना से समृद्धि, सम्पन्नता और संतोष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही साथ व्यक्ति को भक्ति और वैराग्य का आशीर्वाद भी मिलता है।   

इन दशाओं में फलदायी होती है मां अन्नपूर्णा की पूजा-उपासना

  • अगर कुंडली में दरिद्र योग या दिवालिया होने का योग हो।

  • अगर कुंडली में गुरु-चांडाल योग हो।   

  • अगर शनि पंचम, अष्टम या द्वादश भाव में हो।  

  • अगर राहु द्वितीय या अष्टम भाव में हो।   

  • अगर कुंडली में विष योग हो।   

मां की पूजा में बरतें इन बातों की सावधानी-

  • मां अन्नपूर्णा की पूजा प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में या संध्याकाल में करनी चाहिए।

  • पूजा के समय लाल, पीले और श्वेत वस्त्र धारण करें।

  • भगवती अन्नपूर्णा को कभी भी दूर्वा (दूब) अर्पित न करें।

  • मंत्र जाप के लिए तुलसी की माला का प्रयोग न करें।

  • अपनी माता और घर की स्त्रियों का सम्मान करें।

दरिद्रता के नाश के लिए मां अन्‍नपूर्णा की पूजा

  • मां अन्नपूर्णा की पूजा रोज भी कर सकते हैं या केवल शुक्रवार को भी कर सकते हैं।   

  • मां अन्नपूर्णा के चित्र के समक्ष घी का दीपक जलाएं।   

  • संपूर्ण भोजन जरूर चढ़ाएं।   

  • ध्यान रखें कि भोजन अर्पण के पूर्व घर में किसी ने भोजन ग्रहण न किया हो।    

  • तत्पश्चात अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करें या मां के मंत्र का जाप करें।

  • इसके बाद अर्पित किए गए भोजन को प्रसाद की तरह ग्रहण करें।  

 

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