Coffee With Karan Sixth Season Teaser Released

दि राइजिंग न्‍यूज

 

इस वर्ष 31 मार्च को हनुमान जयंती पड़ रही है। बजरंगबली सभी देवों में ऐसे देवता हैं जो अपने भक्तों से बहुत जल्द खुश हो जाते हैं। उनके हर कष्ट को बस नाम लेने से ही हर लेते हैं भगवान हनुमान। महाबली हनुमान आज भी इस पृथ्वी पर जीवित स्थिति में भ्रमण करते हैं। पवन पुत्र के जीवन के कुछ ऐसे रहस्य हैं, जिनके बारे में आपको शायद ही मालूम होगा।

आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ रहस्‍य-

  • हनुमानजी मातंग ऋषि के शिष्य थे। वैसे तो हनुमान जी ने कई लोगों से शिक्षा ली थी। सूर्यदेव और नारदजी के अलावा इन्होंने मातंग ऋषि से भी शिक्षा-दीक्षा ली थी। कहते हैं मातंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमानजी का जन्म हुआ था। ऐसी मान्यता है श्रीलंका के जंगलों में मंतग ऋषि के वंशज आदिवासी से हनुमान जी प्रत्येक 41 साल बाद मिलने आते हैं।

  • हनुमान जी ने अपने प्रभु राम के साथ युद्ध भी किया था। दरअसल, एक बार भगवान राम के गुरु विश्वामित्र किसी कारणवश हनुमानजी से नाराज हो गए और उन्होंने रामजी को हनुमान जी को मौत की सजा देने को कहा। भगवान राम ने ऐसा किया भी, क्योंकि वह गुरु की आज्ञा नहीं टाल सकते थे, लेकिन सजा के दौरान हनुमान जी राम नाम जपते रहे और उनके ऊपर प्रहार किए गए सारे शस्त्र विफल हो गए।

  • हनुमानजी पवन पुत्र हैं। कुंती ने भी पवनदेव के माध्यम से ही भीम को जन्म दिया था। इस तरह से भीम और हनुमान जी भाई हुए।

  • राम भक्त हनुमान माता जगदम्बा के सेवक हैं। हनुमानजी माता के आगे-आगे चलते हैं और भैरवजी उनके पीछे-पीछे। माता के देश में जितने भी मंदिर हैं, वहां उनके आसपास हनुमानजी और भैरवजी के मंदिर जरूर होते हैं।

  • हनुमान जी की प्रार्थना में तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमान बहुक आदि अनेक स्तोत्र लिखे, लेकिन क्या आप जानते हैं सबसे पहले हनुमानजी की स्तुति किसने की थी? दरअसल, सबसे पहले विभीषण ने हनुमानजी की शरण लेकर उनकी स्तुति की थी। विभीषण को भी हनुमानजी की तरह चिरंजीवी होने का वरदान मिला है। वे भी आज सशरीर जीवित हैं। विभीषण ने हनुमानजी की स्तुति में एक बहुत ही अद्भुत और अचूक स्तोत्र की रचना की है।

  • हनुमानजी के पास कई वरदानी शक्तियां थीं, लेकिन फिर भी वे बगैर वरदानी शक्तियों के भी शक्तिशाली थे। अशोकवाटिका पर उन पर ब्रह्रास्त्र का प्रयोग बेअसर था।

  • रामायणलंका कांड शुरू होते ही हनुमान जी ने हिमालय जाकर पत्थरों पर अपने नाखूनों से रामायण लिखनी शुरू कर दी थी। जब रामायण लिखने के बाद बाल्मीकि जी को ये बात हिमालय जाने पर पता चला तो वह हिमालय गए और वहां पर लिखी रामायण पढ़ी मिली।

  • अपनी ठोड़ी के आकार के कारण से इनका नाम हनुमान पड़ा। संस्कृत में हनुमान का मतलब होता है बिगड़ी हुई ठोड़ी।

  • हनुमानजी चार कारणों से सभी देवताओं में श्रेष्ठ हैं। पहला कारण यह है कि सभी देवताओं के पास अपनी शक्तियां नहीं हैं। हनुमानजी के पास खुद की शक्ति है। वे खुद की शक्ति से संचालित हैं। दूसरा कारण, शक्तिशाली होने के बावजूद ईश्वर के प्रति समर्पित हैं। तीसरा कारण, वे अपने भक्तों की सहायता तुरंत ही करते हैं और चौथा कारण वे आज भी सशरीर हैं।

  • हनुमान जी को सभी ब्रह्मचारी के रूप में जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका मकरध्वज नाम का एक बेटा भी था।

जो मित्र दि राइजिंग न्यूज की खबर सीधे अपने फोन पर व्हाट्सएप के जरिए पाना चाहते हैं वो हमारे ऑफिशियल व्हाट्सएप नंबर से जुडें  7080355555

दि राइजिंग न्यूज़

Suggested News

Advertisement