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आषाढ़ महीने की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि शुरू होने जा रहे हैं। आषाढ़ के नवरात्रि 13 जुलाई से 21 जुलाई तक चलेंगे। इस बार गुप्त नवरात्रि की शुरुआत पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग, रवियोग व अमृत सिद्धि योग में नवरात्र का समापन होगा।

गुप्त नवरात्रि में भी आम नवरात्रि की तरह माता की पूजा की जाती है और पूरे नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है। तांत्रिक सिद्धियों की पूजा करने के लिए गुप्त नवरात्रि में मां भगवती के गुप्त स्वरूप यानी काली माता की गुप्त रूप की आराधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि प्रमुख रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है।

क्‍यों कहा जाता है गुप्त नवरात्रि?

गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में मनाए जाते हैं। गुप्त नवरात्रि में मां काली की पूजा जाती है। गुप्त नवरात्रि में माता काली के गुप्त स्वरूप की पूजा करने का विधान है। यह पूजा तंत्र साधना के लिए की जाती है जोकि बहुत ज्यादा कठिन मानी जाती है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

सख्त होते हैं नियम

जिस प्रकार नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में विशेष तौर पर दस शक्तियों की साधना करते हैं। ये नवरात्र खासतौर पर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना से जुड़े लोगों के लिए अहमियत रखते हैं। साधक इस दौरान सख्त नियमों के साथ व्रत रखते हैं। साधक लंबी साधना भी करते हैं।

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