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इस बार बैसाखी शनिवार को पड़ रही है और ऐसा अद्भुत संयोग सालों बाद बन रहा है। ज्योतिषचार्य पंडित संतराम के अनुसार 14 अप्रैल को बैसाखी का पर्व मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस साल बैसाख का महीना 60 दिनों का होगा।

मतलब इस बार लगातार दो महीने बैसाख के महीने के तौर पर चलेगा। पहला महीना 30 मार्च से शुरू हो चुका है जो 28 अप्रैल तक होगा। वहीं, दूसरा महीना 29 अप्रैल से 28 मई तक होगा।

14 अप्रैल को प्रात: 8.10 बजे सूर्य नारायण अश्विन नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। उसके बाद गंगा स्नान से कई पुण्यदायी योग स्नानार्थियों को मिलते हैं। इस बार मेष संक्रांति का महत्व इसलिए भी अधिक बढ़ गया, क्योंकि यह संक्रांति और सोमवती अमावस्या एक दिन के अंतराल से पड़ रहे हैं। यह स्नान 13 जनवरी को होने वाले लोहड़ी स्नान की तरह 13 अप्रैल को पड़ता है।

इस बार विशेषता यह है कि मेष संक्रांति और बैशाखी एक साथ 14 अप्रैल को पड़ रहे हैं। 14 अप्रैल को जब बैशाखी और संक्रांति का मुख्य स्नान प्रारंभ होगा तब धूमाक्ष योग बनेगा। चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे, जो वर्ष की अंतिम राशि है। इसके विपरीत सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष राशि सौर वर्ष की पहली राशि है। इस संक्रमण का पुण्यकाल सवेरे 8.10 बजे तब प्रारंभ होगा, जब सूर्य अश्विन नक्षत्र में आ जाएंगे।

बेहद शुभ है गंगा स्‍नान

बैसाखी में गंगा स्‍नान को बेहद शुभ माना गया है। इसे मेष संक्रांति भी कहते हैं। कहा जाता है कि इस दिन गंगा स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही आपके जीवन में खुशियों के रास्ते भी खुल जाते हैं।

दान का विशेष महत्‍व

इस दिन आप कुछ भी दान कर सकते हैं। वैसे चावल और अनाज दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच रही है। चार दिनी स्नान पर्वों के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब धर्मनगरी पहुंचने लग गया है।

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