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बैशाख मास की तृतीया को गर्मियों की धनतेरस कहे जाने वाले अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त निकाले कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्य शुभ फल प्रदान करते हैं।

ज्योतिषाचार्य व पं. नरेंद्र शास्त्री कुछ ऐसे विशेष उपायों के बारे में बता रहे हैं जो कुंडली दोष दूर करने के साथ-साथ आपकी जिंदगी बदल सकते हैं।

  • अक्षय तृतीया की रात साधक शुद्धता के साथ स्नान कर पीली धोती धारण करें और एक आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं। अपने सामने सिद्ध लक्ष्मी यंत्र को स्थापित करें जो विष्णु मंत्र से सिद्ध को और स्फटिक माला से नीचे लिखे मंत्र का 21 बार जाप करें। मंत्र जाप के बीच उठे नहीं।

  • जन्म कुंडली में स्थित ग्रह यदि अशुभ प्रभाव डाल रहे हैं तो अक्षय तृतीया के दिन तांबे के बर्तन में शुद्ध जल लेकर भगवान सूर्य को पूर्व की ओर मुख करके चढ़ाएं। साथ ही सूर्य मंत्र का जाप करें। यह उपाय करने से सूर्य कुंडली में स्थित ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम करते हैं।

  • अक्षय तृतीया पर अपने सामने सात गोमती चक्र और महालक्ष्मी यंत्र को स्थापित करें। सात तेल के दीपत जलाएं। यह सब एक ही थाली में करें और थाली अपने सामने रखें। शंख की माला से (हुं हुं हुं श्रीं श्रीं ब्रं ब्रं फट्) मंत्र का जाप करें।

  • अक्षय तृतीया की रात को अकेले में लाल वस्त्र पहन कर बैठें। सामने दस लक्ष्मी कारक कौड़ियां पीले रंग की रखकर एक बड़ा तेल का दीपक जला लें।

  • प्रत्येक कौड़ी को सिंदूर से रंग कर हकीक की माला से (ऊं ह्रीं श्रीं श्रि यै फट्) मंत्र का जाप करें। इस उपाय से धन की देवी लक्ष्मी शीघ्र ही प्रसन्न हो जाती हैं और जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती।

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