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...सबकी भरेगी झोली

  • मोदी सरकार का सबको सैलरी देने का प्लान, जानें क्या है स्ट्रैटजी... 
  • यूनिवर्सल बेसिक इनकम नाम की एक नई योजना लाने पर विचार



 

दि राइजिंग न्‍यूज

08 जनवरीलखनऊ।

2014 से ही प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से लोग पूछ रहे हैं कि उनके खातों में 15 लाख रुपये कब आएंगे। विमुद्रीकरण के बाद से तो पूरा विपक्ष पीएम मोदी पर टूट पड़ा कि उन्‍होंने गरीबों के खातों में धन नहीं डाला पर उनका धन लूट लिया। अब केन्‍द्र के नरेन्‍द्र मोदी सरकार इसका जवाब देने की तैयारी में है।


मोदी सरकार देश में हर महीने सबको एक फिक्‍स रकम देने की तैयारी कर रही है। एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में इस बारे में एलान हो सकता... सरकार का विचार है कि देश में हर व्‍यक्ति की एक निश्चित इनकम सुनिश्चित की जाए। शुरुआत में हर व्‍यक्ति को निश्चित इनकम देने वाली स्‍कीम गरीबों के लिए लागू की जाएगी। उसके बाद में इसके तहत देश की पूरी आबादी को कवर किया जा सकता है। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट में एक वरिष्‍ठ अधिकारी के हवाले से यह दावा किया गया है कि इससे देश के अंदर समरूपता लाने में मदद मिलेगी।


क्‍या है स्‍कीम स्‍कीम का नाम है

यूनिवर्सल बेसिक इनकम। इसका मतलब है कि राज्‍य या सरकार देश के हर नागरिक एक निश्चित रकम दे। चाहे कोई व्‍यक्ति काम कर रहा हो या न कर रहा हो। यह रकम एक तरह से नागरिकों के  लिए सोशल सिक्‍युरिटी नेट के तौर पर भी काम करेगी।


मोदी सरकार की यह है प्‍लानिंग  

लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गाय स्‍टैडिंग ने सबको एक निश्चित रकम मुहैया कराने का प्रस्‍ताव तैयार किया है। उनका दावा है कि मोदी सरकार मेंअहम पद संभाल रहे एक व्‍यक्ति ने उनको बताया है कि सरकार आर्थिक सर्वे और आम बजट में यह प्रस्‍ताव ला सकती है।


पायलट प्रोजेक्‍ट में मिले बेहतर नतीजे

मोदी सरकार की इस योजना के तहत लियागया पायलट प्रोजेक्‍ट काफी सफल रही है। इंदौर और दिल्‍ली में छोटे समूह के बीच इस स्‍कीम को पायलट प्रोजेक्‍ट के तौर पर लागू किया गया। इसमें वयस्‍कों को 500 रुपये महीना और बच्‍चों को 150 रुपये महीने दिए गए। इसके बेहतर नतीजे सामने आए। इन लोगों ने हर माह एक निश्चित रकम मिलने के बाद अपनी इनकम को बढ़ाने का प्रयास किया और इसमें सफल भी रहे। . 


सरकार के पास है पर्याप्‍त फंड

इस स्‍कीम को लागू करने के लिए मोदी सरकार के पास पर्याप्‍त फंड है। स्‍कीम को देश भर में लागू करने पर सकल घरेलू उत्‍पाद यानी जीडीपी का तीन से चार फीसदी खर्चा आएगा। वहीं, मौजूदा समय में सरकार सब्सिडी पर जीडीपी का चार से पांच फीसदी खर्च कर रही है। यह जरूर है कि इस स्‍कीम को लागू करने के बाद पहले से दी जा रही सब्सि‍डी को खत्‍म करना पड़ेगा। बेसिक इनकम स्‍क्‍ीम और सब्सिडी साथ-साथ नहीं चल सकती है। इसलिए हर तरह की सब्सि‍डी को खत्‍म करना पड़ेगा। बेसिक इनकम स्‍क्‍ीम और सब्सिडी साथ-साथ नहीं चल सकते। 


गरीबों से हो सकती है शुरुआत  

मोदी सरकार शुरुआत में गरीबों को एक माह एक निश्चित रकम देने से इस स्कीम की शुरुआत कर सकती है।  ऐसे में जिनकी इनकम का कोई जरिया नहीं है, उनको इससे बड़ा सहारा मिल सकता है। सरकार इस तरह से 20 करोड़ लोगों को हर माह एक निश्चित रकम दे सकती है। बाद में इस स्‍कीम के तहत देश के हर नागरिक को कवर किया जा सकता है। हालांकि इस योजना को लाने के बाद समाजिक सरोकारों से जुड़ी कई योजनाएं बंद होंगी। जिसमें सभी तरह की पेंशन योजनाएं भी शामिल हैं।. 


भ्रष्‍टाचार पर लगेगा अंकुश

इस स्‍कीम को लागू करके सरकार भ्रष्‍टाचार पर भी अंकुश लगा सकती है। मौजूदा समय में सरकार लोगों को कई तरह के बेनिफिट देती है। लेकिन भ्रष्‍टाचार की वजह से ये बेनिफिट लोगों तक नहीं पहुंच पाते हैं। इसके बजाए सरकार लोगों के अकाउंट में सीधे पैसा ट्रांसफर करेगी तो यह पैसा सीधा लोगों तक पहुंचेगा। 


कहां से आएगा इतना पैसा

देश के सवा अरब लोगों को हर महीना 500 रुपये देने से सरकार पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। ऐसे में इस बोझ से निपटने के लिए नया हल निकला गया। प्रोफेसर गाय के मुताबिक, अगर स्कीम को पूरे देश में लागू किया जाता है तो जीडीपी का तीन से चार फीसदी खर्च आएगा, जबकि अभी कुल जीडीपी का चार से पांच फीसदी सरकार सब्सिडी में खर्च कर रही है। यानी कि इस स्कीम को लागू करने के बाद सरकार को चरणबद्ध तरीके से सब्सिडी समाप्त करने की दिशा में भी कदम उठाना पड़ेगा।


यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम और सब्सिडी दोनों साथ-साथ नहीं चल सकतीं। इसके अलावा इस स्कीम के लिए सरकार माइनिंग और बड़े प्रॉजेक्ट पर अलग से सरचार्ज निकालकर राशि जुटा सकती है। मुझे नहीं लगता है कि कहीं से फंड की कमी होगी। मोदी सरकार शुरुआत में यह स्कीम सिर्फ गरीबों के लिए लॉन्च कर सकती है। इस तरह से सरकार 20 करोड़ लोगों को हर माह एक निश्चि्त रकम दे सकेगी। बाद में इस स्कीइम को बढ़ाकर सभी के लिए कर दिया जाएगा। प्रोफेसर  गाय ने यह भी संकेत दिया कि सरकार इसे फेज वाइज लागू करेगी। आपको बताते चलें कि प्रोफेसर गाय पूरी दुनिया में यूनिवर्सल बेसिक इनकम  की वकालत कर रहे हैं।

 

 

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