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अमर प्रेम में तार-तार यादव परिवार

  • आखिर सही साबित हुई आशंकाएं
  • अखिलेश के फूटी आंख नहीं सुहा रहे थे अमर



 

दि राइजिंग न्‍यूज ब्‍यूरो

संजय शुक्ल

30 दिसंबर, लखनऊ।

कहावत है, जहां-जहां पैर पड़े . . . तहां बंटाधार। कॉरपोरेट घरानों से लेकर राजनैतिक पार्टियों तक में इस मिसाल को सही साबित करने वाले अमर सिंह एक कमाल कहें या संयोग एक बार फिर सामने गया है। पार्टी में वापसी पाकर बने राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह को लेकर यही आशंका पिछले लंबे समय से जताई जा रही थी। मगर अब यह आशंकाएं सच साबित होती दिख रही हैं। यही नहीं, समाजवादी पार्टी चल रही उठापटक के पीछे अमर सिंह की भूमिका से इंकार नहीं किया जा रहा है।

पहले बिग बी अमिताभ बच्चन का परिवार, फिर अंबानी परिवार और फिर समाजवादी पार्टी। यानी अमर सिंह जिससे ज्यादा नजदीकी हुए, वहां परिवार ही बिखर गया। एक बार फिर यह दिख रहा है और इस बार इस अमर प्रेम का शिकार सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का परिवार है। तल्खी इतनी ज्यादा है कि एक तरफ मुलायम सिंह, शिवपाल सिंह व उनका परिवार है तो दूसरी अखिलेश यादव, राम गोपाल यादव व उनसे जुड़े परिवार के सदस्य।

अमर सिंह और अखिलेश यादव की तनातनी छिपी भी नहीं है। सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद राम गोपाल यादव भी अमर सिंह को कतई पसंद नहीं करते हैं लेकिन तमाम विरोध के बावजूद अमर सिंह पार्टी में इंट्री पाने में कामयाब हो ही गए।


उनके यादव परिवार में इंट्री को लेकर जो तल्खी थी, वह दो महीने पहले खुलकर दिखने लगी। शुरुआत में तो बढ़ती तल्खी की वजह मुख्य मंत्री आउट साइडर (अमर सिंह) को माना जाता रहा। मुख्यमंत्री तो आउट साइडर को आउट करने की मांग करते रहे लेकिन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के अमर प्रेम के आगे उनकी एक न चली। अब जब पार्टी टूटने की कगार पर पहुंच गई है, तो अमर सिंह का रोल फिलहाल खुलकर सामने नहीं आया है।


इतना जरूर है कि गत मंगलवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव जब विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों की सूची लेकर सपा सुप्रीमो के पास पहुंचे थे तो उनके साथ अमर सिंह भी थे। यानी अखिलेश से आहत दोनों नेताओं की मौजूदगी में ही प्रत्याशियों की सूची तय की गई। या यूं भी कहा जा सकता है कि पार्टी में जो कुछ हो रहा है, उसका ज्ञान राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह को भलीभांति था।


परिवार का टकराव अब इस कदर बढ़ चुका है कि समाजवादी पार्टी में दो फाड़ दिखने लगे हैं लेकिन पूरे घटनाक्रम में अमर सिंह कहीं नहीं है। पक्ष में न विपक्ष में। हालांकि वह हमेशा खुद को मुलायम सिंह का छोटा भाई ही करार देते रहे,  हालांकि अपने भतीजे के साथ रिश्तों की तल्खी का जवाब टालते रहे हैं। ऐसे में देखने वाला यही होगा कि पार्टी के बिखराव के वक्त अमर सिंह की भूमिका क्या होगी।

 

 

 

 

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