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एक जगह ऐसी, जहां छूने पर पड़ती है कोड़ों की मार

  • एक-दूसरे को छूने पर भी मिलती है कोड़ों की सजा
  • इंडोनेशिया के इस राज्‍य में लागू है सरिया का कानून



 

दि राइजिंग न्‍यूज

विश्‍व में एक ऐसा देश है जहां पर अविवाहित लोगों के एक-दूसरे को छूने, गले लगाने और किस करने पर कोड़ों की सजा दी जाती है। मिलने वाली सजा देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ का मजमा लगता है। बाकायदा सजा का ऐलान होता है। सजा पाने वाल अधिकांश महिलाएं ही होती हैं, जिनके लिए भीड़ तरह-तरह के नारे लगाती है। आप जानना चाहते हैं कि यह कौल सा देया है तो आगे पढ़िए... किस तरह से इस्‍लामिक कानून के नाम पर महिलाओं को मजाक बनायाउ जाता है। फिलहाल इस देश को हम इंडोनेशिया के नाम से जानते हैं। यहां के एक राज्‍य का हाल ही में स्‍वायत्‍ता मिली है जिसके उसने कड़े शरिया कानूनों को लागू किया है जिसके बाद महिलाओं की आफत आ गई है।


आचे में यह बेलगाम शरिया कानून लागू

सबसे ज्‍यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया के सिर्फ एक राज्‍य- आचे में यह बेलगाम शरिया कानून लागू है। यहां ढेर सारे अपराधों के लिए कोड़े मारने की सजा का प्रावधान है। जुआ खेलने, शराब का सेवन करने से लेकर गे-सेक्‍स पर भी लोगों को सरेआम कोड़े मारने की सजा सुनाई जाती है। इसी राज्‍य के इस्‍लामिक नियमों को तोड़ने पर एक नौजवान महिला को भीड़ के सामने कोड़े मारे गए। यह महिला 21-30 साल के बीच थी। महिला उन सात पुरुषों और छह महिलाओं में से एक थी, जिनपर राजधानी बंदा आचे की एक मस्जिद में कोड़े बरसाए गए। महिला पर आरोप था कि, एक लड़के के गले लगी हुई थी। इसी तरह के आरोप सभी महिलाओं पर लगाए गए। एक महिला पर आरोप लगाया कि उसने एक पुरुष का हाथ पकड़ रखा था। जबकि एक और महिला पर एक युवक के साथ एक ही कुर्सी पर बैठे होने का आरोप लगाकर कोड़े बरसाए गए।


गर्भवती महिला को बाद में मारने की सौगंध

एक 22 साल की महिला पर कोड़े बरसाए जाने थे, मगर उसे गर्भवती होने की वजह से तात्‍कालिक छूट दे गई है, लेकिन आचे के डिप्‍टी मेयर जैनल अरिफिन ने कसम खाई है, बच्‍चे को जन्‍म देने के बाद उसे सजा दी जाएगी। अधिकारी ने कहा कि उसे उम्‍मीद है कि बेंत मारने की सजा डेटरेंट (रोकने वाला) की तरह काम करेगी हमें उम्‍मीद है कि बंदा आचे में अब ऐसा कोई नहीं है जो भविष्‍य में कानून तोड़ेगा।


सजा पाने वालों की हर रोज बढ़ोतरी

जकार्ता की केन्‍द्र सरकार ने यह कदम लंबे समय से चली आ रहे अलगाववादी विद्रोह को दबाने के लिए उठाया था। 2005 में केन्‍द्र सरकार से एक शांति समझौता उलझ जाने के बाद राज्‍य में इस्‍लामिक कानून और सख्‍त कर दिए गए हैं। 90 प्रतिशत से ज्‍यादा इंडोनेशियाई खुद को मुस्लिम बताते हैं, लेकिन ज्‍यादातर लोग आस्‍था के उदारवादी रूप में विश्‍वास रखते हैं।

 

सोशल मीडिया पर भी बवाल

पिछले कुछ सालों में सऊदी अरब में नागरिक अधिकारों और महिला अधिकारों को लेकर सवाल भी उठाए जाते रहे हैं। सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी यहां काफी मतभेद है। एक वर्ग इसे इस्लाम के खिलाफ बताता है तो दूसरा धड़ा इसे उचित मानता है।


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