• वसंतकुंज और मालवीय नगर बिना कागजात के रह रहे 20 विदेशी पकड़े गए
  • एवरेस्‍ट पर चढ़ने के बाद गायब भारतीय रवि कुमार मृत पाए गए
  • सिख विरोधी दंगा मामले में जगदीश टाइटलर ने लाई डिटेक्‍टर टेस्‍ट कराने से किया इंकार
  • मुंबईः कॉकपिट से धुआं निकलने के बाद एयर इंडिया फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, सभी यात्री सुरक्षित
  • लखनऊ: IAS अनुराग तिवारी की मौत के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR
  • कोयला घोटाला: पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता को 2 साल की सजा
  • PM मोदी की हत्या करने के लिए 50 करोड़ रुपये का ऑफर, विदेश से आई कॉल

Share On

धार्मिक आजादी पर हमला बर्दाश्त नहीं: फरंगी महली

  • धार्मिक मसलों में सियासी दखल
  • ऑल इंडिया पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य खालिद राशिद फरंगी महली



 

संजय शुक्ल

मुस्लिम महिलाओं का तीन तलाक के नाम पर उत्पीड़न और शोषण आज चर्चा का विषय बन चुका है। इस मामले में केंद्रीय लॉ कमीशन ने लोगों से राय भी मांगी है। केंद्र सरकार की मुहिम से आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड खासा नाराज है। उसने इसे शरीयत पर सीधे हमला करार देते हुए इसे यूनीफार्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) लागू करने की साजिश करार दिया है। पर्सनल ला बोर्ड इस मसले पर इतना संजीदा है कि मस्जिदों से ऐलान करके महिलाओं से शरीयत कानून का समर्थन मांगा गया है। ताकि महिलाओं की राय को केंद्र सरकार व सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जा सकें। इसी मुद्दे को लेकर दि राइजिंग न्यूज ने ऑल इंडिया पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य एवं ईदगाह के इमाम खालिद रशीद फरंगी महली से बेबाक बात की . . .


प्रश्न - तीन तलाक को लेकर आखिर इतना हंगामा क्यों। इससे महिलाओं को समानता का अधिकार मिलेगा, उनका उत्पीड़न बंद होगा

फरंगी महली- कैसा उत्पीड़न। इस्लाम दुनिया का वह धर्म है जिसने सबसे पहले महिलाओं को अधिकार दिए हैं। पति की संपत्ति पर हक। मां-बाप की संपत्ति पर हक। या यूं भी कह सकते हैं कि लेडीज फर्स्ट की शुरुआत इस्लाम ने ही कही। रही बात उत्पीड़न की तो देश में हर घंटे एक महिला का दहेज के लिए उत्पीड़न हो रहा है। यह कहीं ज्यादा गंभीर मसला है। समानता की बात करने वाले इसे रोकने के लिए क्या कर रहे हैं। उन्हें ये क्यों नहीं दिख रहा है। इस्लाम में तो महिलाओं को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं। तलाक के मामले में भी पुरुषों को एक ही अधिकार है जबकि महिलाओं को दो अधिकार हैं। निकाह से पहले भी महिला से सहमति ली जाती है। बाकी जगह तो ऐसा नहीं होता है।



प्रश्न- अगर इतना कुछ है तो फिर 22 मुल्कों में तीन तलाक का कानून प्रतिबंधित क्यों है?

फरंगी महली- यह एकदम बेबुनियाद व मनगढ़त बातें हैं। इस्लाम धर्म कुरान व हदीस पर आधारित है। शरीयत के कानूनों पर ही चलता है। इस प्रतिबंध की बात करने वालों के पास कोई आधार नहीं है। शरीयत का कानून कहता है कि जियो और जीने दो। इसके अलावा कुछ भी नहीं है।


प्रश्न -  फिर इस इतना हंगामा क्यों मचा हुआ है?

फरंगी महली - यह सारा मामला सियासी है। महज सर्वे के आधार पर पूरी रिपोर्ट तैयार कर दी गई। टीवी स्टूडियो में बैठने वाली कुछ महिलाओं के अनर्गल बयानों से यह स्थिति आ गई है। अगर महिलाओं को इतनी दिक्कत हो रही होती तो यह बात पर्सनल लॉ बोर्ड के नेशनल कांफ्रेंस में क्यों नहीं उठती। वहां पर तो लाखों की संख्या में महिलाएं शामिल होती हैं। दरअसल वह पूरा सर्वे ही महज नौ सौ महिलाओं पर आधारित है, उनमें अधिसंख्य अनपढ़ महिलाएं थीं। उसी को लेकर सारा तानाबाना बुन दिया गया।



प्रश्न- मुस्लिम महिलाओं को अधिकार दिए जाने और समानता का हक मिलने से पर्सनल लॉ बोर्ड की आपत्ति क्यों है?

फरंगी महली- किस समानता की बात हुक्मरान कर रहे हैं। जिस देश में पंद्रह हजार लोग रोज भूखे सोते हैं। जहां नब्बे फीसद अंक पाने वाला बच्चा इस कारण नौकरी नहीं पा सकता क्योंकि वह उच्च जाति या सामान्य वर्ग का होता है। जबकि साठ फीसद अंक पाने वाले बच्चा नौकरी इसलिए पा जाता है क्योंकि वह आरक्षित श्रेणी का है। अगर समानता की बात की जा रही है इसें संपूर्णता में होना चाहिए। न कि धर्म विशेष के लिए।


प्रश्न- पूरे प्रकरण को आप कैसे देखते हैं?

फरंगी महली- यह शरीयत कानून पर हमला है। मजहबी जज्बातों पर हमला किया जा रहा है और इसे कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है। कुरान औऱ हदीस की बुनियाद पर आधारित शरीयत कानून में तब्दीली कैसे बर्दाश्त की जा सकती है। इसके लिए पर्सलन ला बोर्ड पूरे देश में महिलाओं का पक्ष जानेगा। हस्ताक्षर अभियान चलाकर उन्हें लॉ कमीशन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

 

 

Share On

 

अन्य खबरें भी पढ़ें

HTML Comment Box is loading comments...

खबरें आपके काम की

 

 

https://gcchr.com/

 

 



शहर के कार्यक्रम एवं शिक्षा से जुड़ीं ख़बरें